
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। रक्षाबंधन पर्व पर कलाई में बांधा जाने वाला धागा कल्पना से अधिक मजबूत हैं। यह धागा भाई-बहन के रिश्ते को अटूट मजबूती देता हैं। रक्षाबंधन का यह पर्व दो अलग-अलग धर्मो की एकता को भी इस रिश्ते में बांधता हैं।
मंदसौर का मुस्लिम भाई सईद चौधरी को एक-दो नहीं बल्कि 60 बरसों से हिंदू बहन रामीबाई मीणा राखी बांध रही हैं। दोनों बताते हैं की कभी भी नहीं लगता कि हम अलग-अलग धर्म के हैं, राखी का त्योहार हर साल हम दोनो भाई-बहन साथ में बनाते हैं। बहन रामीबाई का अपनत्व भरी राखी का प्यार भाई सईद चौधरी की कलाई पर हर साल सजता हैं।
आज रक्षाबंधन पर्व हैं। भाई-बहन के स्नेह के इस पर्व की मजबूती का अंदाजा ही नहीं लगाया जा रहा हैं। यह पर्व दो मजहबों को भी एकता के सूत्र में बांधता हैं, कई भाई-बहन अलग-अलग धर्मो के होने के बावजूद राखी की डोर से सगे भाई-बहन की भांति जुड़े हुए हैं और राखी के धागे से बने इस रिश्ते को दशकों से निभा रहे हैं।
मंदसौर के 82 वर्षीय सईद चौधरी हिंदू बहन से पिछले 60 बरसों से राखी बंधवा रहे हैं। लगभग 60 साल पहले सईद चौधरी के खेत जग्गाखेड़ी गांव के पूनमचंद्र मीणा खेती कार्य में सहायता करते थे। चौधरी उन्हें अपने बेटे की तरह ही दुलार करते थे। उन्होंने पूनमचंद्र का विवाह रामी नामक लड़की से करवाया और स्वयं भाई की रस्म निभाई। तभी से रक्षाबंधन पर्व पर सईद चौधरी और रामीबाई साथ-साथ मना रहे हैं, जो आज तक जारी है।
सईद चौधरी ने बताया की अब रामी मीणा भी बुजुर्ग हो गई हैं, 60 बरसों में कभी भी ऐसी राखी नहीं रही जब रामीबाई ने अपने भाई सईद चौधरी को राखी न बांधी हों। चौधरी का कहना हैं की उनके परिवार में रक्षाबंधन का पर्व रामी के बिना अधूरा हैं। पूरा परिवार रामीबाई का इंतजार करता हैं। रामी हर वर्ष आती हैं और अपने भाई सईद चौधरी व पूरे परिवार को सदस्यों को राखी बांधती हैं। रामीबाई राखी के दिन कहीं भी हों, मंदसौर जरूर आतीं और चौधरी परिवार के साथ त्योहार मनातीं हैं। वर्तमान में अधिक उम्र होने के कारण मल्हारगढ़ में रहती हैं।

राकेश कंडारा, मुकेश कंडारा और उनकी बहन रीना कालेट। (सौजन्य)
पिपलियामंडी। देश की सेवा में तैनात भाइयों को हर साल बहन राखी भेजकर उसकी सलामती की दुआ कर रही हैं। पिपलियामंडी के निवासी राकेश कंडारा सीआरपीएफ में पदस्थ है और वर्तमान में दिल्ली में तैनात है। वहीं छोटा भाई मुकेश भी सीआरपीएफ में हैं और वर्तमान कश्मीर में तैनात हैं।
भाई राकेश व मुकेश पांच बरसों से रक्षाबंधन पर घर नहीं आए है। हर साल बहन रीना कालेट अपने भाइयों को यहीं से राखी भेजती है और राखी के साथ भाईयों की सलामती की बहुत सारी दुआएं भी भेजती हैं। जहां भाई पदस्थ हैं वह पिपलियामंडी से 1000 किलोमीटर दूर हैं। रीना कालेट ने बताया की रक्षाबंधन के दिन भाई से फोन पर बात करती हूं। इस साल इंतजार था लेकिन छुट्टी नहीं मिलने के कारण भाई नहीं आ सके। हर साल भाईयों को राखी भेज रही हूं।
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