
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर : शहर की सड़कों पर जगह-जगह हो रहे गड्ढों से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है। सड़कों के गड्ढों को भरने के लिए अब जर्मनी की तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए इंदौर से आई एक टीम ने मंदसौर शहर की कुछ सड़कों पर गड्ढे भरकर प्रयोग किया।
इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष रमादेवी गुर्जर और सीएमओ पीके सुमन भी मौके पर पहुंचे और कार्य का निरीक्षण किया। यह प्रयोग सफल रहता है और नए मटेरियल के परिणाम बेहतर मिलते हैं, तो पूरे शहर की सड़कों पर बने गड्ढों को भरने के लिए इस मटेरियल का उपयोग करने के लिये नपा बैठक कर निर्णय ले सकती है।
वर्षा ऋतु में शहरभर की सड़को पर गड्ढे हो गए हैं। कई सड़कें पूरे सालभर ही गड्ढे से भरी रहती हैं, इसके कारण राहगीरों को आवाजाही मेें परेशानियां हो रही है। नगर पालिका द्वारा कुछ-कुछ दिनों में कभी कच्चा तो कभी पक्का पेचवर्क किया जा रहा हैं, लेकिन यातायात के अधिक दबाव और बारिश से पेचवर्क बार-बार उखड़ रहा है।
शहर के गड्ढों से स्थाई निजात के लिये अब एक नया प्रयोग शहर में शुरू हुआ है। शहर की सड़कों के गड्ढों काे भरने के लिये हुए ट्रायल में जो मटेरियल भरा गया है, उसके लिये संबंधित कंपनी का दावा है कि पैचवर्क के चार घंटे बाद ही यातायात शुरू किया जा सकता है और यह बेहद टिकाऊ है। दावा यह भी है कि जहां नए मटेरियल से पैचवर्क किया जाएगा उस जगह से सड़क नहीं उखड़ेगी भले ही आसपास से पूरी सड़क उखड़ जाएं।
कंपनी के दावे और शहर में टिकाऊ पेचवर्क की मांग को देखते हुए नपा ने इस नए प्रयोग को शुरू करवाया हैं। इंदौर से आई टीम ने सोमवार को महाराणा प्रताप बस स्टैंड के समीप मार्ग पर विमल प्रिंटर्स के सामने हो रहे गड्ढो को भरने का काम किया। इन गड्ढो को भरने के लिये जर्मनी की तकनीक का उपयोग किया गया।
नगरपालिका अध्यक्ष रमादेवी गुर्जर, सीएमओ पीके सुमन सहित नपा के इंजीनियर और अधिकारी भी यहां पहुंचे और पेचवर्क की प्रक्रिया देखी, मटेरियल के इस्तेमाल के तरीके की जानकारी ली। सोमवार को कुछ गड्ढो को भरने में इसका प्रयोग किया गया है। इसके परिणाम बेहतर रहते हैं तो आने वाले दिनों में पूरे शहर में इसी मटेरियल से सड़को पर पेचवर्क होगा।
जर्मनी की तकनीक पर आधारित गड्ढों को भरने वाले नए मटेरियल को लेकर संबंधित कंपनी ने दावा किया है कि गड्ढे में मटेरियल भरने के चार घंटे बाद उस स्थान से कितना भी भारी यातायात गुजर जाए, पेचवर्क पर उसका असर नहीं पड़ेगा। कंपनी के अनुसार, जिस जगह गड्ढा भरा गया है, वहां की मरम्मत इतनी मजबूत होगी कि आसपास की सड़क टूट सकती है, लेकिन पैचवर्क वाला हिस्सा अपनी जगह बरकरार रहेगा। कंपनी का दावा सही साबित होता हैं तो शहर में बड़ी राहत हो सकती हैं, बार-बार गड्ढे भरने और सड़क की मरम्मत कराने की समस्या भी खत्म हो जाएगी। हालांकि, नए मटेरियल की मजबूती और टिकाऊपन का सही आंकलन पैचवर्क के कुछ दिन बाद ही हो सकेगा।
नगरपालिका अध्यक्ष और सीएमओ ने मौके पर पहुंचकर किए जा रहे कार्य को देखा। यह प्रयोग सफल रहा तो नगर पालिका द्वारा पूरे शहर की सड़को पर गड्ढो में नए मटेरियल को भरा जाएगा। इंदौर से आए अधिकारियों के अनुसार जर्मनी की तकनीक पर आधारित इस नए मटेरियल का उपयोग भारत में मंदसौर पहला शहर हैं जहां हो रहा हैं। मंदसौर में ही पहला ट्रायल हैं। जिन गड्ढो को भरा गया हैं वह मजबूत रहेंगे भारी यातायात से भी नहीं उखड़ेगा तो फिर पूरे शहर में इसी तरह का पैचवर्क नजर आएगा।
शहर की सड़को पर पैचवर्क के लिये नए तरह के मटेरियल की कंपनी के कुछ लोग नपाध्यक्ष से मिले थे, कंपनी का दावा है कि नए मटेरियल से सड़कों के गड्ढों में पैचवर्क करने के बाद चार घंटे बाद ही यातायात शुरू किया जा सकता हैं, और यह उखड़ेगा भी नहीं। प्रयोग के तौर पर अभी महाराणा प्रताप बस स्टैंड के समीप सड़क पर गड्ढे भरवाए गए हैं, प्रयोग सफल रहता हैं तो हम पीआईसी में बैठक कर निर्णय लेंगे। यह तकनीक जर्मनी की बताई जा रही है। -पीके सुमन, सीएमओ नपा मंदसौर
डामर व सीमेंट की सड़कों पर बारिश के कारण गड्ढे हो जाते हैं। सड़कों के गड्ढों को भरने के लिये जर्मनी के प्रोडक्ट को हमने भारत में तैयार किया है। इस प्रोडक्ट का देश में मंदसौर में पहला ट्रॉयल हैं। देश में पहली बार यहां ट्रॉयल हो रहा है। इस मटेरियल से सड़क के गड्ढे को भरने के चार घंटे बाद ही यातायात उस मार्ग से शुरू किया जा सकता हैं। कितना भी भारी यातायात हाे इस नए मटेरियकल से हुए पेचवर्क पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, जहां पैचवर्क किया गया है, वहां सड़क नहीं खुदेगी, भले ही आसपास की सड़क उखड़ जाएगी, लेकिन वहां कुछ नही होगा। अभी ट्रायल किया गया है, आगे नपा मंदसौर जो निर्णय लेगी उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। -राजेश शाह, सदस्य, इंदौर टीम
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