अवैध खनन से हुए गड्ढे बारिश में पानी से भर कर मौत के गड्ढे बन चुके हैं। हाल ही में ऐसे ही बड़े गड्ढे में डूबने से देवास जिले के सोनकच्छ में पांच मासूमों की जान जा चुकी है। मालवा-निमाड़ में सड़कों के निर्माण के लिए मुरम की जरूरत पूरी करने के लिए सड़क के पास ही गड्ढे खोदने और गिट्टी-पत्थर निकालने के बाद विशाल गड्ढों को भगवान भरोसे छोड़ने का चलन हो गया है। बारिश के पानी से भरे इन गड्ढों का उपयोग आसपास के ग्रामीण नहाने और अन्य उपयोग के लिए करते हैं। हादसे इसलिए होते हैं क्योंकि न तो किसी को गड्ढों की गहराई पता है और न ही वहां सुरक्षा के उपाय हैं। हादसे होने पर मदद का मरहम और जांच का दिखावा कुछ दिनों के लिए जरूर होता है, लेकिन बाद में सब कुछ भुला दिया जाता है। जिम्मेदार तो यह मानने तक को तैयार नहीं हैं कि अवैध खनन जैसा कुछ होता भी है।

देवास। सोनकच्छ के कंका खजुरिया गांव में अवैध खनन से बनी तलैया में पांच बच्चों की डूबने से मौत के बाद भी प्रशासन नहीं जागा है। न तो अवैध खनन करने वालों के खिलाफ पुख्ता कार्रवाई हुई और न ही उन जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों से कोई सवाल पूछा गया कि आखिर इतना बड़ा गड्ढा हो कैसे गया। कागजी खानापूर्ति के नाम जांच समिति जरूर बना दी गई है लेकिन जांच के नतीजे भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने में कितने प्रभावी होंगे, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। हकीकत यह है कि देवास शहर सहित पूरे जिले के रास्तों पर इस तरह के गड्ढे अकाल मौत को निमंत्रण दे रहे हैं। देवास शहर के बायपास मार्ग पर बालगढ़ हनुमान मंदिर के पास अवैध खनन की वजह से बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। मंदिर आने-जाने वाले इन जानलेवा गड्ढों की वजह से परेशान हैं। 15 साल से 25 फीट तक गहरी तलैया बनी हैं। क्षेत्र में एक युवक और एक बालक की डूबने से मौत के बाद भी प्रशासन ने सुध नहीं ली है। इसी तरह भोपाल रोड पर खटांबा, जामगोद के पास और मक्सी रोड सियापुरा गांव के पास भी मौत के गड्ढे देखे जा सकते हैं। सरसौदा औद्योगिक क्षेत्र में भी गड्ढों की वजह से बड़ा हादसा हो सकता है। मानसिंगपुरा और भूरियापुरा के पास जानलेवा गड्ढे सभी को नजर आते हैं, लेकिन प्रशासन के किसी अधिकारी की निगाह अब तक उन पर नहीं पड़ी। 2013 में नाचनमोर से कुसमानिया के लिए पुंजापुरा से कांटाफोड़ होते हुई सड़क निर्माण किया गया था। इसके लिए पुंजापुरा के समीप भूरियापुरा में 300 फीट गहरा गड्ढा कर गिट्टी मशीन के लिए प्लांट डाला गया था। प्लांट वर्तमान में तालाब बन गया है और मुख्य सड़क के किनारे वीरान पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना प्रशासन की सहमति के कोई जमीन खोदने का साहस नहीं कर सकता। यह सब मिलीभगत से हो रहा है।

हो चुके हैं हादसे, ग्रामीणों ने किया था विरोध प्रदर्शन

खरगोन। नर्मदा, कुंदा और वेदा नदी में अवैध रेत खनन से हुए बड़े-बड़े गड्ढे मुसीबत बन गए हैं। गोगावां और कसरावद में नदी के ऐसे ही गड्ढों में डूबने से दो लोगों की मौत हो चुकी है। समीपस्थ ग्राम कुम्हारखेड़ा में एक पखवाड़े पहले कुंदा नदी में अवैध रेत खनन से परेशान ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था। प्रशासनिक अफसरों ने मौके पर भंडारित करीब 33 डंपर काली रेत जब्त कर चार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। सरपंच रमेश, उपसरपंच संतोष आदि ने बताया कि नदी में दिन-रात काली रेत का खनन चल रहा है। इससे नदी में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। कई लोगों के नदी के दूसरे छोर पर खेत हैं, किसानों को नदी से होकर खेतों में पहुंचना पड़ता है। इन गड्ढों में गिरकर किसान और मवेशी आए दिन चोटिल होते रहते हैं। बच्चों के डूबने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। अवैध खनन में लगे डंपरों के गांव से गुजरने पर भी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। गोगावां के दयालपुरा में नदी से रेत निकालने के दौरान अगस्त 2018 में खदान धंसने से श्यामू पिता भाऊसिंह (18) निवासी दयालपुरा की मौत हो चुकी है।

मजबूरी में कर रहे काम : झिरन्या में वेदा और रूपारेल नदी में अवैध खनन हो रहा है। श्रमिक कालू, दिनेश, शेखर, राजेश ने बताया कि गहरे पानी में डुबकी लगाकर रेत निकालना पड़ती है। ऐसे में डूबने का भय बना रहता है। सरकारी काम है नहीं और खेती-बाड़ी में भी काम नहीं मिलता। इसलिए घर चलाने के लिए हमें अपने जीवन जोखिम में डालना ही पड़ता है। भीकनगांव में एक ट्रैक्टर रेत करीब ढाई हजार रुपए में बिकती है।

* जिले में अवैध खनन को रोकने के लिए टीम सक्रिय है। लगातार कार्रवाई की जा रही है। कुछ दिन पहले कुम्हारखेड़ा में ग्रामीणों के विरोध के बाद चार लोगों के खिलाफ केस बनाए गए हैं। -ज्ञानेश्वर तिवारी, जिला खनिज अधिकारी, खरगोन

टूलेन को फोरलेन में बदला तो मुरम के लिए खोद दिए गड्ढे

शाजापुर। जिले से होकर गुजरे एबी रोड को टूलेन से फोरलेन किया गया है। इसके लिए आसपास मुरम की खुदाई से बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। बारिश का पानी भरने से ये गड्ढे खतरनाक हो गए हैं। इससे बीते दो साल में कई हादसे हो चुके हैं। पिछले साल सात जुलाई को मक्सी में सिंचाई कॉलोनी के पास गड्ढे में डूबने से बंटी उर्फ तिलक (14) पिता रुकमाचंद निवासी मक्सी और गणेश (14) पिता बद्रीलाल निवासी तालोद जिला उज्जैन की मौत हो चुकी है। 15 जुलाई को बेरछा के ग्राम रुलकी के तुषार (11) पिता पिंटू कंजर और अर्पित (11) पिता संजू कंजर की गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी। 29 जुलाई को ग्राम पनवाड़ी निवासी नन्निाका (7) और शिवानी (5) की एबी रोड कि नारे बने गड्ढे में डूबने से जान चली गई थी। 25 सितंबर को ग्राम बाड़ीगांव निवासी भाइयों नरेंद्र और महिपाल की भी खुले पानी के गड्ढे में डूबने से जान गई। गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान भी मक्सी में दो युवकों की मौत हुई। बीते पांच-छह महीने में पानी की तलाश में 15 से अधिक हिरण, नीलगाय आदि जानवर कुओं में गिर चुके हैं। इनमें से कु छ जान चली गई। कुछ गंभीर घायल हो गए थे। बिना मुंडेर के कुओं में अधिकांश हादसे हुए। 2016 में तत्कालीन कलेक्टर ने ऐसे खतरनाक कुआं मालिकों के विरुद्ध अभियान चलाया था। शाजापुर में दो दर्जन से अधिक कु एं हैं, जबकि जिले मे मोहन बड़ोदिया में सबसे अधिक ऐसे कुएं हैंं। शुजालपुर, कालापीपल, बेरछा, मक्सी, गुलाना, अकोदिया, पनवाड़ी, कालीसिंध, बोलाई, पोलायकलां, अवंतिपुर बड़ोदिया, सलसलाई आदि क्षेत्रों में भी बिना मुंडेर के कु एं हैं।

अवैध खनन के बाद छोड़ दिया, अब कहलाता है 'बारह बीघा का तालाब'

नीमच। सीमावर्ती जिला होने से अवैध खनन और खनिज उत्पादों का अवैध परिवहन सामान्य बात है। अवैध खनन से बने गड्ढों में कई हादसे होने के बावजूद जिला और पुलिस प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। खनिज विभाग भी कार्रवाई करने के बजाय अवैध खनन की बात ही नकारता है। सिंगोली तहसील में पिपलीखेड़ा- बिलखंडा रोड का निर्माण हुआ। इसके लिए कदवासा रोड और बारह बीघा क्षेत्र में अवैध खनन कि या गया। इससे हुआ बड़ा गड्ढा अब तक भरा नहीं गया है। इसे बारह बीघा के तालाब के नाम से पुकारा जाने लगा है। मनासा के नजदीक सावन कु ंड और जीरन तहसील के चीताखेड़ा क्षेत्र में भी अवैध खनन के निशान देखे जा सकते हैं। कुकड़ेश्वर से 4 किमी दूर घोटा पिपलिया-खड़ावदा मार्ग के निर्माण के दौरान भी अवैध खनन हुआ। इसके निशान खड़ावदा में मौजूद हैं। नयागांव में बड़ी तादाद में अवैध खनन हुआ है।

* हादसे कहीं भी हो सकते हैं : हादसे तो कहीं भी हो सकते हैं। कोई भी नदी या तालाब में भी डूब सकता है। हर बार अवैध खनन को मुद्दा बनाना उचित नहीं है।-जेएस भिड़े, जिला खनिज अधिकारी

* अवैध खनन नहीं : जिले में अवैध खनन के हालात नहीं है। यदि कहीं खतरनाक गड्ढे हैं तो उन्हें दिखवाएंगे। अवैध खनन के गड्ढों में डूबने के मामले भी अब तक सामने नहीं आए हैं।-- राके श कु मार सगर, एसपी नीमच

संदलपुर, रोशनी और लखोरा क्षेत्र में अधिक खतरा

खंडवा। जिले के खालवा क्षेत्र में सड़क निर्माण कंपनी सहित अवैध खनन करने वालों ने आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर खनन कर रखा है। बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भरने से आसपास के गांव वाले परेशान हैं। बच्चे परिवारवालों को बिना बताए इन खदानों के पास पहुंच जाते हैं। ऐसे में हादसों की आशंका बनी रहती है। खालवा से लखोरा मार्ग पर गिट्टी क्रेशर खनन के लिए खोदे गड्ढे भी हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। रोशनी की खदान में 2018 में एकलव्य विद्यालय के छात्र की डूबने से मौत हो चुकी है। ग्राम संदलपुर में 2017 में जूनापानी का बच्चा डूब चुका है। पाडल्यामाल के पास गिट्टी खदान में अगस्त 2010 में एक ही परिवार के पांच बच्चों की डूबने से मौत की बड़ी घटना की वजह भी ऐसे ही जानलेवा गड्ढे हैं। अवैध खनन से बने पानी के गड्ढों ने जिले में भी बड़े दुख दिए। इसी साल 13 अगस्त को रावण रुंडी और चौथखेड़ा रोड पर गड्ढों में भरे पानी में डूबने से रतन पिता श्यामा भील (12) और लक्ष्मी पिता बाबू भील (5) की मौत हो गई। वहीं सिंगोली के बारह बीघा के तालाब में डूबने से 27 जुलाई को महुपुरा पूरण के विनोद पिता नंदकि शोर धाकड़ (14) की जान गई।

यह किया जाना चाहिए : बीड़ स्थित थर्मल पॉवर स्टेशन से बड़ी मात्रा में राखड़ निकलती है। राखड़ का उपयोग इन गड्ढों को भरने के लिए किया जा सकता है। गड्ढों को सही आकार देकर जलाशयों के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। कम से कम तार फेंसिंग कर सुरक्षित तो किया ही जा सकता है। खालवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे गड्ढे जलसंकट में भी उपयोगी हो सकते हैं।

* अवैध खनन की जानकारी मिलने पर कार्रवाई की जाती है। वैध खदान संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गड्ढों के पास सुरक्षा घेरा बनाएं। गड्ढों को थर्मल पॉवर प्लांट की राखड़ से भरने और जलाशयों के रूप में विकसित करने का प्रयास करेंगे। -सचिन वर्मा, जिला खनिज अधिकारी

मुलथान में जून में डूबे थे दो बच्चे

धार इंदौर-अहमदाबामद राष्ट्रीय राजमार्ग पर धार फोरलेन सहित आसपास के कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां जोखिम भरे गड्ढों की भरमार है। सुसारी, कुक्षी, धरमपुरी में भी जानलेवा गड्ढों की अनदेखी हो रही है। मुलथान में 27 जून को पानी भरे गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत हो चुकी है।

न तो सुरक्षा के लिए फेंसिंग की, न ही खदानों को पूरी तरह समतल किया

बुरहानपुर। जिले में बंद हो चुकी करीब आधा दर्जन गिट्टी खदानों में बीते तीन साल में एक बच्ची सहित तीन लोगों की जान जा चुकी है। शहर से लगे जैनाबाद, दर्यापुर, नसीराबाद आदि स्थानों पर मौजूद इन खदानों से लीज होल्डरों ने खूब पत्थर निकाला और क्रॅशर से गिट्टी बनाकर बेच डाली, लेकिन पत्थर खत्म होने के बाद खदानों को लावारिस छोड़ दिया। यहां न तो सुरक्षा के लिए फेंसिंग की और न ही खदानों को पाटा गया। बारिश के पानी से छोटी-छोटी तलैया का रूप ले चुकी इन खदानों का उपयोग स्थानीय लोग नहाने के लिए कर रहे हैं। इससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। जैनाबाद की बंद खदान में दो साल पहले एक मजदूर की बच्ची की डूबने से मौत के बाद काफी हंगामा हुआ था, लेकि न खनिज विभाग, जिला प्रशासन और खदान संचालकों ने ध्यान नहीं दिया। ऐसी खदानों को लेकर न सिर्फ खनिज विभाग बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी सख्त निर्देश जारी कर रखे हैं। खनिज विभाग के अफसरों का कहना है कि फिलहाल जिले में गिट्टी खदानें बंद हैं, पूर्व की इन खदानों की हालत क्या है यह शायद उन्हें नहीं मालूम।

रेत माफिया पर अंकुश नहीं कार्रवाई भी रही बेअसर

उज्जैन। जिले में मिट्टी और रेत का अवैध खनन सबसे ज्यादा होता है। इस साल की फरवरी में चिकली व आसपास के करीब एक किमी क्षेत्र में गंभीर नदी से रेत खनन का बड़ा मामला खनिज विभाग ने पकड़ा था। यहां आठ नावों में मोटर लगाकर नदी से रेत का अवैध खनन किया जा रहा था। जांच दल को देख खनन करने वालों ने तीन नाव नदी में डुबो दी थी। दल ने पांच नाव और एक जेसीबी सहित करीब नौ ट्रॉली रेत जब्त की थी। घट्टिया तहसील के बड़वई गांव में भी नदी से रेत का अवैध खनन मामला पकड़ा जा चुका है। बड़नगर रोड पर नवंबर 2018 में गंभीर नदी से रेत का अवैध खनन करने के लिए बिछाया गया 70 मीटर लंबा पाइप लाइन का सेटअप भी जब्त हो चुका है। असलाना व सेमलिया नसर जोड़ स्थित नदी में ड्रमों पर पाइप लाइन के सेटअप से रेत का खनन होता था। पाइप का एक सिरा नदी के बाहर तो दूसरा सिरा गंभीर की गहराई में होता था। किनारे पर एक नाव थी, जिस पर पॉवरफुल मोटर लगाई गई थी। मोटर को चालू करने पर पाइप में पानी के साथ रेती भी आती थी। तत्कालीन नायब तहसीलदार आलोक चौरे व खनिज निरीक्षक जयदीप नामदेव ने इस सेटअप को पकड़ा था। मामले अभी न्यायालयों में चल रहे हैं। शिप्रा और गंभीर नदी से रेत का अवैध खनन करने वाले माफिया हर साल करोड़ों का कारोबार करते हैं। इसमें पर्दे के पीछे रसूखदारों के भी जुड़े होने से प्रशासनिक अफसर ठोस कार्रवाई नहीं कर पाते। यही वजह है कि बड़ी कार्रवाइयों के बाद भी नदी से खनन नहीं थम सका है।

* अवैध खनन रोकने के लिए लगातार जांच की जा रही है। बारिश के कारण अभी काम बंद है। सरकार की नई नीति के तहत जल्द ही नई खदानों को भी नीलाम किया जाएगा। इससे अवैध खनन रुकेगा। - जयदीप नामदेव, खनिज निरीक्षक

Posted By: Nai Dunia News Network

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