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गांधीसागर में बढ़ेगा चीतों का कुनबा: जुलाई में 'कूनो' से आएंगे बोत्सवाना के नए मेहमान; एक नर और एक मादा चीता लाने की तैयारी

गांधीसागर अभयारण्य में चीता पुनर्वास परियोजना को नई गति मिलने जा रही है। जुलाई के पहले सप्ताह में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से दो और चीतों ( एक नर और एक मादा ) को गांधीसागर लाने की तैयारी चल रही है।

By Alok SharmaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sat, 20 Jun 2026 10:12:04 AM (IST)Updated Date: Sat, 20 Jun 2026 10:16:14 AM (IST)
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गांधीसागर में बढ़ेगा चीतों का कुनबा: जुलाई में 'कूनो' से आएंगे बोत्सवाना के नए मेहमान; एक नर और एक मादा चीता लाने की तैयारी
जुलाई में गांधीसागर में एक नर व मादा चीता को छोड़ने की योजना है। फाइल फोटो।

HighLights

  1. जुलाई में कूनो से एक नर और एक मादा चीता गांधीसागर अभयारण्य लाए जाने की तैयारी
  2. गांधीसागर अभयारण्य में मादा चीता धीरा की मेटिंग के कई प्रयास अब तक असफल रहे हैं
  3. चीतों की संख्या बढ़ने से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। गांधीसागर अभयारण्य में चीता पुनर्वास परियोजना को नई गति मिलने जा रही है। जुलाई के पहले सप्ताह में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से दो और चीतों ( एक नर और एक मादा ) को गांधीसागर लाने की तैयारी चल रही है। वन विभाग को उम्मीद है कि इससे अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़ाने और प्रजनन कार्यक्रम को सफलता मिलने की संभावना मजबूत होगी।

गांधीसागर अभयारण्य में छोड़े गए नर चीता प्रभास और पावक को लगभग डेढ़ साल पूरा होने को है। मादा चीता धीरा को भी सितंबर में एक साल हो जाएगा, पर यहां चीतों का कुनबा बढ़ाने के प्रयासों को झटका लग रहा है। धीरा के मेटिंग के सारे प्रयास नाकाम हो गए हैं जबकि वन विभाग के अधिकारी कई बार तीनों को साथ में छोड़ चुके हैं।


कूनो से आएंगे नए मेहमान

अब यहां फिर से उम्मीदें जीवंत हुई हैं। कूनो में रह रहे बोत्सवाना के चीतों में से दो को जुलाई में गांधीसागर अभयारण्य में लाने की सूचना मिल रही है। इनमें नर-मादा शामिल हैं। अफ्रीका महाद्वीप के देश बोत्सवाना से फरवरी में चीतों को लाकर कूनो में रखा गया है।

उनमें से दो-तीन के गांधीसागर अभयारण्य में लाए जाने का इंतजार चल रहा है। खबर मिल रही कि जुलाई के प्रारंभ में कूनो से दो चीते गांधीसागर अभयारण्य में छोड़े जा सकते हैं। हालांकि विधिवत सूचना वन विभाग के अधिकारियों को नहीं मिली है। अलबत्ता वन विभाग की आवश्यक तैयारियां चल रही हैं।

यह भी पढ़ें- कूनो में खुले जंगल में छोड़ी गई निर्वा और उसके तीन शावक, अहेरा जोन में पर्यटकों को आएंगे नजर

चीता परियोजना पर अंतरराष्ट्रीय नजर

बता दें कि गांधीसागर में 20 अप्रैल 2025 को दो नर चीता प्रभास और पावक को छोड़ा गया था। वहीं, 17 सितंबर 2025 को मादा चीता धीरा को छोड़ा गया था। प्रभास व पावक 15.5 वर्ग किमी के एक बाड़े में हैं। धीरा भी इससे सटे 15.5 वर्ग किमी के बाड़े में हैं।

चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट के तहत चल रहे इस कार्यक्रम को लेकर अक्टूबर 25 में दक्षिण अफ्रीका के पांच सदस्यीय दल ने गांधीसागर अभयारण्य का भी दौरा किया था। उन्होंने यहां चीता प्रोजेक्ट के तहत 64 वर्ग किमी क्षेत्र में बनाए गए बाड़ों को देखा।

प्रभास, पावक व धीरा की गतिविधियों की देखा। उनके रखरखाव सहित अन्य सुविधाओं को भी देखा था। इसके बाद अफ्रीकी दल ने चीतों को लेकर किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा भी की थी।

धीरा की मेटिंग के लिए कई बार प्रयास किए गए हैं, पर सफलता नहीं मिली है। अब हम इंतजार कर रहे हैं कि बोत्सवाना से कूनो लाए गए चीतों में से यहां कितने चीतों को भेजने का निर्णय लिया जाता है। हमारी इच्छा है कि हमें मादा चीता मिले। चीतों के बसने से पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा, जल थल और नभ के पर्यटन की अपार संभावना लिए आर्थिक उन्नति का माध्यम भी गांधीसागर बनेगा। - संजय रायखेरे, डीएफओ

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