
महू। बारिश के मौसम में महू के पर्यटन स्थल खासे चर्चा में रहते हैं। जाम दरवाजा इनमें खास है, लेकिन इस ऐतिहासिक इमारत की दुर्दशा हो रही है जिस पर किसी का ध्यान नहीं है। पुरानी इमारत होने के बावजूद इसमें इन दिनों पान-गुटखे की दुकानें लग रही हैं। दीवारें खराब हो रही हैं। वहीं महू-मंडलेश्वर हाईवे का पूरा काम हो चुका है, लेकिन जाम दरवाजे के अंदर के करीब तीस फुट के हिस्से में कई गड्ढे हैं। इतिहास प्रेमी भी इन अनदेखियों से दुखी हैं, लेकिन न तो शासन और न ही लोग जाम गेट को बचाने के लिए कोई काम करने की इच्छा जता रहे हैं।
मालवा-निमाड़ की साझी विरासत जाम दरवाजा इलाके की एक ऐतिहासिक धरोहर है जिसे देवी अहिल्या ने बनवाया था। एक ओर उनकी बनाई इमारतों को जहां खास सम्मान दिया जाता है तो वहीं जाम दरवाजा अनदेखी का शिकार है। इस इमारत की दुर्दशा पर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों में से कुछ गैरजिम्मेदार लोग यहां जाम दरवाजे की दीवारों को कुरेदते हैं। यहां फिजूल बातें लिखते हैं। इन्हें रोकने या टोकने वाला यहां कोई नहीं है।
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ऐतिहासिक इमारत में सिगरेट-गुटखा मिल रहा
जाम दरवाजा भले ही तीन सौ साल पुरानी इमारत हो, लेकिन इसकी परवाह किसी को नहीं है। इस इमारत का ऐतिहासिक महत्व भी है, लेकिन फिलहाल इसके अंदर सिगरेट, पान-गुटखे की दुकानें लग रही हैं। गुटखा खाने के बाद लोग अक्सर जाम दरवाजे की दीवारों पर थूकते नजर आ जाते हैं। ऊपर शराब की बोतलें भी मिलती हैं। दीवारों का प्लास्टर उखड़ने लगा है।
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जाम गेट के अंदर तीस फुट में गड्ढे
महू-मंडलेश्वर राजमार्ग जाम दरवाजे से होकर ही गुजरता है। यह सड़क करीब पूरी तरह बन चुकी है, लेकिन जाम दरवाजे के अंदर करीब तीस फुट के हिस्से में ही कई गड्ढे हैं। इनमें बारिश का पानी भर रहा है। सड़क बनाने वाले ठेकेदार ने इस स्थान पर संभवतः कोई काम ही नहीं किया है।
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लोगों पर चेतावनी का असर नहीं
जाम दरवाजे की ओर अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए महू प्रशासन ने यहां सेल्फी लेने पर दो सौ रुपए दंड का बोर्ड भी लगा दिया है, लेकिन लोग इसके बावजूद ऊंचाई से सेल्फी लेते नजर आए। कुछ समय पहले यहां से एक युवक की गिरने से मौत भी हुई थी। पिछले दिनों यहां आने वाले लोगों से पांच रुपए प्रति व्यक्ति टिकट और पार्किंग के लिए पैसा लेने की योजना प्रशासन और जनपद पंचायत ने बनाई थी, लेकिन इसके बाद भी यहां कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। बताया जाता है कि इस तरह मिलने वाली आमदनी से यहां चौकीदार और सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
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जाम गेट ऐतिहासिक है, लेकिन फिलहाल हेरिटेज घोषित नहीं है, इसलिए यहां पूरी देखरेख नहीं हो पा रही है। इसका प्रस्ताव लंबित है। वहीं जो दूसरी अनियमितताएं हैं, हम उन पर गंभीरता से ध्यान देंगे। -अंशुल गुप्ता, एसडीएम, महू
यह दुखद है। लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। हमारी शासन से भी अपील है कि वह इस शानदार इमारत का ध्यान रखे। दस्तावेजों में केवल हेरिटेज होने से इसका सम्मान नहीं होना चाहिए। यह मालवा निमाड़ की साझी विरासत है। यह हमारा इतिहास है। इसे हमें ही सहेजना होगा।- देवकुमार वासुदेवन, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी, महू
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