
नईदुनिया प्रतिनिधि, महू : टीवी सुधारने में देरी होने की बात पर विवाद के बाद इलेक्ट्रानिक दुकान संचालक नीलेश अग्रवाल की गोली मारकर हत्या करने वाले पूर्व आर्मी जवान जयदीप सिंह परिहार को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
डॉ. आंबेडकर नगर महू स्थित प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. प्रीति श्रीवास्तव ने 28 अक्टूबर को प्रकरण में फैसला सुनाते हुए आरोपित पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। आरोपित जयदीप सिंह परिहार (48) निवासी लक्ष्मी विहार कालोनी, महू को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया गया।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसे जघन्य एवं चिह्नित प्रकरण की सूची में शामिल किया गया था। उपनिदेशक अभियोजन आशीष कुमार खरे ने बताया कि मामले की प्रतिमाह समीक्षा की गई और अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े प्रत्येक पहलू को न्यायालय के समक्ष रखा।
विशेष लोक अभियोजक महेंद्र सिंह मुजाल्दे ने शासन की ओर से पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से 13 साक्षियों के बयान कराए गए। अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार फरियादी विकास अग्रवाल की श्याम विलास चौराहे पर मोबाइल की दुकान है। उसके बड़े भाई नीलेश अग्रवाल की गोकुलगंज महू में इलेक्ट्रानिक की दुकान थी। 12 सितंबर 2022 को विकास अपने भाई की दुकान पर गया था। दोपहर करीब 3.45 बजे ग्रे रंग की एक्टिवा से एक व्यक्ति दुकान पर पहुंचा। उसने नीलेश से कहा कि उसकी टीवी दो महीने से दुकान पर रखी है, लेकिन अब तक सुधारकर नहीं दी गई।
इस पर नीलेश ने बताया कि तबीयत ठीक नहीं होने के कारण दुकान बंद थी। इसी वजह से टीवी समय पर सुधारकर नहीं दे पाया। यह बात सुनकर ग्राहक गाली-गलौज करने लगा। उसने अपना नाम जयदीप सिंह परिहार बताया और कहा कि वह गवली पलासिया महू में रहता है तथा आर्मी से सेवानिवृत्त है। जब नीलेश ने उसे गालियां देने से मना किया तो विवाद बढ़ गया।
विवाद के दौरान जयदीप सिंह परिहार ने रिवाल्वर निकाल ली और नीलेश अग्रवाल पर जान से मारने की नीयत से गोली चलाने लगा। उसने लगातार चार से पांच फायर किए। इनमें से एक गोली नीलेश की बाईं आंख के पास और दूसरी सीने में लगी। बाकी गोलियां जमीन पर लगीं।
गोली चलाने के बाद आरोपित मौके से भाग गया। घटना के समय विकास अग्रवाल और उनकी मां उषा अग्रवाल दुकान पर मौजूद थे। उन्होंने अपनी आंखों से पूरी घटना देखी थी। गोली चलने के दौरान डर के कारण दोनों इधर-उधर छिप गए थे, इसलिए नीलेश को बचाने के लिए बीच-बचाव नहीं कर सके। इसके बाद घायल नीलेश अग्रवाल को उपचार के लिए किशनगंज स्थित मेवाड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
घटना की सूचना मिलने पर महू पुलिस ने आरोपित जयदीप के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया। पुलिस ने घटनास्थल का मौका नक्शा तैयार किया और मृतक का पोस्टमार्टम कराया। साथ ही साक्षियों के बयान दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार किया। विवेचना पूरी होने के बाद चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
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