Indian Army Day : 1821 में बने महू किले में अब तक रखे जाते थे गोला-बारूद
कुछ समय पहले सेना ने जगह कम पड़ने के कारण इसे खाली कराया। 1857 की क्रांति में किले में बंदी बनाया था अंग्रेजों को । ...और पढ़ें
By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Sat, 14 Jan 2023 11:08:33 PM (IST)Updated Date: Sun, 15 Jan 2023 12:04:35 PM (IST)

Indian Army Day महू (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रविवार को देशभर में भारतीय सेना दिवस मनाया जा रहा है। सेना की दृष्टि से मालवा के महू का अलग महत्व है। महू का पुराना किला भी भारतीय सेना के इतिहास से जुड़ा है। यह किला अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था। यहां पर उस समय गोला -बारूद रखा जाता था। किले का उपयोग अब तक गोला- बारूद रखने के लिए किया जाता था। पर कुछ समय पहले जगह छोटी पड़ने के कारण किले को पूरी तरह खाली कर दिया गया।
महू किले की नींव होल्कर और ब्रिटिश के बीच संधि में रखी
महू के फोटोग्राफर और समाजसेवी देवकुमार वासुदेवन सेना के इतिहास के भी जानकार है। उन्होंने बताया कि महू किले की नींव होल्कर और ब्रिटिश के बीच एक संधि में रखी गई। तीसरे एंगलो मराठा वार के दौरान 21 दिसंबर 1817 को महिदपुर में होल्कर और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच युद्ध लड़ा गया था।
गद्दार के कारण युद्ध ब्रिटिश सेना ने जीत लिया
इस युद्ध में ब्रिटिश सेना का नेतृत्व थामस हिस्लाप द्वारा किया जा रहा था। जबकि होल्कर सेना का नेतृत्च 11 साल के महाराज मल्हार राव होल्कर तृतीय, 22 साल के हरिराव होल्कर और 20 साल के भीमा बाई होल्कर ने किया। हालांकि होल्कर कैंप के एक गद्दार के कारण यह युद्ध ब्रिटिश सेना ने जीत लिया। इसके बाद होल्कर और ब्रिटिश के बीच मंदसौर में 6 जनवरी 1818 को एक संधि हुई। जिसमें होल्कर ने अंग्रेजों की सभी मांगें मानी। इसमें एक मांग महू में छावनी बनाने की जगह देने की थी।
3 महीने तक किले में दफनाया था शहीद अंग्रेजी अधिकारियों को
मध्य 1818 से महू में ब्रिटिश फौज आना शुरू हुई। उप कमांडेंट जॉन माल्कम मालवा के पहले मिलिट्री कमांडेंट थे। किला 1821 में बनकर तैयार हुआ जहां पर गोला- बारूद रखा जाता था। इसके बाद 1857 की क्रांति में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों पर हमला किया जिसमें ब्रिटिश सेना के 3 बड़े अधिकारी महू में मारे गए। तब वहां से कुछ सिपाही भागकर इंदौर चले गए। कुछ किले में ही छिप गए। क्रांतिकारियों ने किले का घेराव कर लिया।
किले की रक्षा के लिए दक्षिण से अंग्रेजों की सेना आई और फिर उन्होंने क्रांतिकारियों पर हमला किया। इसके बाद किले में बंद अंग्रेजों को आजाद करवाया। इस दौरान तीन अधिकारियों की जिनकी मृत्यु हुई उन्हें तीन महीनों तक किले में दफनाया गया। बाद में उन्हें महू के क्रिश्चियन ग्रेवियार्ड में दफनाया गया।
किले का उपयोग गोला -बारूद रखने के लिए ही किया जाता रहा
इस किले का उपयोग भारतीय सेना द्वारा गोला -बारूद रखने के लिए ही किया जाता रहा। पर कुछ समय पहले इस किले को खाली करवा दिया गया। 1948 में पहले भारतीय कमांडर इन चीफ ने संभाला था पदभार रविवार को भारतीय सेना दिवस पर मध्य भारत की सबसे बड़ी महू छावनी के इन्फैंट्री स्कूल, आर्मी वार कालेज, मिलिट्री कालेज आफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और सभी सैन्य प्रतिष्ठान के सभी रैंकों द्वारा सेना दिवस मनाया जाएगा।
इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए माल रोड स्थित इन्फैंट्री युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद अधिकारियों और नागरिक कर्मचारियों का एक विशेष सैनिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
इसलिए मनाया जाता है यह दिन
सेना दिवस उस दिन को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है जब आर्डर आफ ब्रिटिश एंपायर से सम्मानित पहले भारतीय अधिकारी जनरल केएम करियप्पा ने 1948 में भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार संभाला था। यह सेना के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि थी। करियप्पा बाद में देश के पहले फील्ड मार्शल बने।