Jam Gate : अब पुरातत्व विभाग करेगा जाम गेट और किले की देखरेख
Jam Gate : निरीक्षण के दौरान जाम गेट की इमारत की मरम्मत करने के लिए क्या किया जाना है इसे देखा। ...और पढ़ें
By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 14 Aug 2019 02:20:19 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Aug 2019 02:24:32 PM (IST)

महू, नईदुनिया प्रतिनिधि। तहसील मुख्यालय से करीब तीस किलोमीटर दूर पर्यटन स्थल होलकर कालीन जाम गेट व किले को जल्दी ही पुरातत्व विभाग अपने अधीनस्थ लेगा। इसके लिए मंगलवार को विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण कर यहां की स्थिति देखी तथा जल्दी ही योजना तैयार की जाएगी। मंगलवार को पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एसआर वर्मा ने तहसीलदार धीरेंद्र पाराशर के साथ जाम गेट का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यहां की व्यवस्थाओं को देखा तथा इसके इतिहास की जानकारी ली।
वर्तमान में यहां क्या-क्या व्यवस्था है तथा और कौन सी व्यवस्था की जाना अनिवार्य है ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक यहां आ सकें। निरीक्षण के दौरान जाम गेट की इमारत की मरम्मत करने के लिए क्या किया जाना है इसे देखा। अधिकारियों ने जाम गेट के अलावा यहां के किले का भी निरीक्षण कर वहां की स्थिति देखी। निरीक्षण के दौरान जाम गेट के अंदुरुनी भाग की टूटफूट, कीचड़, अंधेरा आदि समस्या को देखा। दोनों इमारतों को व्यवस्थित करने के लिए क्या कार्य करना है इसके लिए भी अधिकारियों ने चर्चा की। बताया जाता है कि इस पर्यटन स्थल को जल्दी ही पुरात्व विभाग सरंक्षित कर इसकी पूरी जिम्मेदारी लेगा।
अगर पुरातत्व विभाग ने इसे अपने क्षेत्र में शामिल कर लिया तो आने वाले दिनों में जामगेट और किला पूरी तरह व्यवस्थित हो जाएगा तथा पर्यटकों को होने वाली समस्या का निराकरण होकर उन्हें व्यवस्था मिलेगी। जल्द ही पुरात्व विभाग के अधिकारी यहां के लिए योजना बना कर विभाग को भेजेंगे। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरु कर दिया जाएगा। इसमें जाम गेट व किले का जीर्णोद्धार किया जाएगा ताकि इसकी पुरानी सुंदरता वापस लौट सके। इस दौरान अधिकारियों ने पार्वती मंदिर का भी निरीक्षण किया तथा यहां मौजूद मूर्ति को बचाने के लिए सिंदूर नही लगाने की बात कही।
विभाग द्वारा इस इमारत को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित करने के लिए जल्दी ही प्रस्ताव संस्कृति विभाग को भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि जाम गेट की दुर्दशा को लेकर नईदुनिया ने कई बार समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किए हैं।