
नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। बैंक आफ इंडिया के आठ खातेदारों की फिक्स डिपाजिट को तोड़कर 23 लाख नौ हजार रुपए की रकम को मुरैना ब्रांच के तत्कालीन कर्मचारियों ने दूसरे आठ खातों में ट्रांसफर कर दिया। जांच में गबन प्रमाणित पाया जाने पर बैंक के डिप्टी जोनल मैनेजर ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ग्वालियर में आठ बैंक कर्मचारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध पंजीबद्ध कराया है। अब इस प्रकरण की विवेचना पुलिस अधीक्षक ईओडब्ल्यू ग्वालियर करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, मुरैना में जीवाजीगंज में बैंक आफ इंडिया की ब्रांच है। इसमें आठ खातेदार शहनाज बानो, सीमा, ज्ञानदेवी सागर एवं ज्योति खान (संयुक्त खाता), श्रीकृष्ण माहौर, रामगोविंद कुलश्रेष्ठ, शांति देवी एवं नत्थीलाल ने अलग-अलग रकम की फिक्स डिपाजिट कराई थी। वर्ष 2013 से 2016 तक मुरैना ब्रांच में पदस्थ रहे हैड कैशियर महेन्द्र सिंह बाजौरिया, अन्य कर्मचारी गौरीशंकर राम, रूचि तिवारी, इन्द्रनाथ विश्वास, विकास शर्मा, विकास त्रिवेदी, विजय कुमार मेहता एवं सौरभ मिश्रा ने मिलकर फिक्स डिपाजिटों को समय से पहले तोड़ दिया।
एफडी की राशि 23,09,450 रुपए के चार वास्तविक खातों एवं चार फर्जी खातों में डालकर, खाताधारकों की जानकारी के बिना कूटरचित व्हाउचरों के माध्यम से निकाल लिया। फिक्स डिपाजिट जब मैच्योर हो गईं तब खातेदारों का बैंक आना शुरू हुआ तो भंडाफोड़ हुआ कि उनकी 11 एफडी को तो एक साल पहले ही तोड़ लिया गया और रकम भी दूसरे खातों में ट्रांसफर कर निकाल ली गई।
बैंक प्रबंधन के पास जब आठ खातेदारों की शिकायत पहुंची और हंगामा होने लगा तब भोपाल से बैंक आफ इंडिया के जोनल मैनेजर ने पूरे मामले की जांच कराई तो मुरैना ब्रांच के आठ कर्मचारी गबन में लिप्त पाए गए। बाद में दोषी कर्मचारियों को मुरैना से हटाने की कार्रवाई की गई और खातेदारों के फिक्स डिपाजिट का पैसा उनको ब्याज समेत वापस किया गया। बाद में बैंक द्वारा कराई गई जांच के प्रतिवेदन को एफआईआर के लिए आर्थिक अपराध शाखा ग्वालियर को भेजा गया।
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ईओडब्ल्यू ने कैशियर महेन्द्र सिंह बाजौरिया सहित अन्य बैंक कर्मचारी गौरीशंकर राम, रूचि तिवारी, इन्द्रनाथ विश्वास, विकास शर्मा, विकास त्रिवेदी, विजय कुमार मेहता एवं सौरभ मिश्रा के विरुद्ध भादवि की धारा 420, 409, 467, 468, 471, 120बी एवं भ्रनिअ 1988 संशो० अधि० 2018 धारा 7 13 (1) (क) सहपठित धारा 13 (2) के तहत एफआईआर पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है। आर्थिक अपराध शाखा ने प्रारंभिक जांच में पाया कि उक्त आठ आरोपियों ने वास्तविक ग्राहकों की आईडी का उपयोग कर उनकी जानकारी के बिना फर्जी बचत खाते खोले और कुछ ग्राहकों के वास्तविक खातों का उपयोग किया।
आर्थिक अपराध शाखा ने बैंक ऑफ इंडिया मुरैना में पदस्थ रहे जिन आठ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा कायम किया है। उनमें हैड कैशियर महेन्द्र सिंह बाजौरिया, अन्य कर्मचारी गौरीशंकर व इन्द्रनाथ विश्वास रिटायर हो चुके हैं।