
नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना: मुरैना जिला अस्पताल में मरीज और परिजन गहरी परेशानी का सामना कर रहे हैं। वार्ड की हालत इतनी खस्ता है कि मरीज फटे गद्दों और अधूरी चादरों पर भर्ती हैं। ठंड से बचने के लिए मरीज अपने घरों से रजाई-कंबल लाकर पलंग पर लेटे हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी अत्यंत कमजोर है। वार्डों में रोजाना मरीजों और अटेंडरों के पैसे, मोबाइल या अन्य कीमती सामान चोरी होने की शिकायत अस्पताल पुलिस चौकी तक पहुंच रही है।
अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी है। रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण प्रसूताओं और अन्य जरूरतमंद मरीजों की सोनोग्राफी जांच नहीं हो पा रही। मरीजों को निजी अस्पताल या लैब में भेजा जा रहा है। इसके अलावा विशेषज्ञ सर्जन, टीबी चेस्ट फिजिशियन, गायनिक और मेडिकल विशेषज्ञ डॉक्टर भी अधूरी संख्या में हैं। कुल मिलाकर 25 डॉक्टरों के पद खाली हैं, जिससे ओपीडी और रात की ड्यूटी में भी चिकित्सकीय सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
सर्जरी वार्ड में भर्ती 60 वर्षीय रहीसा खान 12 जनवरी को आपरेशन के लिए भर्ती हुई थीं। बीते एक सप्ताह से वह पांव की हड्डी टूटने के कारण पलंग पर ही पड़ी हैं। इलाज के नाम पर उनके पैर में ईंट बांधकर पलंग से नीचे लटका दी गई है। इसी तरह 67 वर्षीय शांति पत्नी लालाराम जाटव की जांघ की हड्डी टूट गई, वे भी एक सप्ताह से पलंग पर पड़े हैं। बागचीनी चौखट्ठा निवासी रामकली पत्नी रमेश जगनेरी 10 दिसंबर को घायल हुई थीं, उनका आपरेशन 22 दिन बाद हुआ, जबकि अभी भी भर्ती हैं।
रविवार को छुट्टी होने के कारण डॉक्टर और नर्सों की कमी देखने को मिली। महिला जनरल वार्ड में एक महिला सुरक्षा गार्ड को नर्स की तरह इंजेक्शन देने और दवाइयां देने के लिए तैनात किया गया। मरीजों को इंजेक्शन और दवाइयां अपने हाथ में लेने के लिए कहा गया। सुरक्षा और चिकित्सा की इस असंगति का वीडियो लेने की कोशिश करने पर नर्स और महिला सुरक्षा गार्ड ने सिविल सर्जन से अनुमति लेने की बात कही और वहां से हट गईं।
जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में प्रसूताओं से खुलेआम ऑपरेशन और प्रसव के लिए पांच-पांच हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। शनिवार को एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक प्रसूता की सास हाथ जोड़कर कह रही थी कि बहू से रुपये मांगे जा रहे हैं, नहीं देने पर रेफर कर दिया जा रहा है। रविवार को भारती पत्नी विश्वंभर कुशवाह (19 वर्ष) को भी निजी अस्पताल भेजने की धमकी दी गई, लेकिन परिजन जिला अस्पताल में ही प्रसव करवाने पर अड़े रहे। सरकारी अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज प्राइवेट मेडिकलों पर निर्भर हैं।
मुरैना शहर से गुजरने वाले दो हाईवे के कारण हादसों की संख्या अधिक है। करीब दस साल पहले ट्रामा सेंटर का भवन बनवाया गया, उपकरण खरीदे गए, लेकिन सेंटर शुरू नहीं हो सका। इसके सात साल तक प्रसूति वार्ड चला। नया भवन बनने के बाद तीन साल से सर्जरी वार्ड चल रहा है। गंभीर हादसों में घायल मरीज बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किए जाते हैं।
अस्पताल की खस्ता हालत के कारण मरीज और परिजन मानसिक और शारीरिक रूप से पीड़ित हैं। ठंड में कंबल, फटे गद्दे, डॉक्टरों की कमी, प्रसूताओं से वसूली, सुरक्षा की कमी और उपकरणों की अनुपलब्धता अस्पताल की गंभीर समस्याओं को उजागर कर रही हैं।