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चंबल नदी के पर्यावरणीय प्रवाह का होगा वैज्ञानिक अध्ययन

सीईसी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में केंद्रीय जल आयोग, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान से राज्य सरकार के साथ संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययन कराने की सिफारिश की है।

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 06:54:26 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 06:54:26 PM (IST)
चंबल नदी के पर्यावरणीय प्रवाह का होगा वैज्ञानिक अध्ययन

HighLights

  1. सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी ने निरीक्षण के बाद सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की रिपोर्ट
  2. पर्यटन गतिविधियों का विस्तार वन्य जीव संरक्षण की कीमत पर नहीं
  3. चंबल अभयारण्य में रिक्त पदों पर हो जल्द तैनाती की अनुशंसा

नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन और जलीय जीवों के संरक्षण के संबंध में गठित सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने नदी क्षेत्रों में निरीक्षण के बाद सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में कहा है कि चंबल नदी का संरक्षण केवल अवैध खनन रोकने तक सीमित नहीं है।

मंगलवार को पेश रिपोर्ट में सीईसी ने केंद्रीय जल आयोग, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान से राज्य सरकार के साथ संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययन कराने की सिफारिश की है।

पर्यटन गतिविधियों का विस्तार वन्य जीव संरक्षण की कीमत पर नहीं

सिफारिश में चंबल नदी के मौसमी और कम पानी के प्रवाह, पर्यावरणीय जरूरतों, ऊपरी क्षेत्रों में पानी के उपयोग और घड़ियाल, डाल्फिन, कछुए सहित दूसरे जलीय जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना होगा। इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों का विस्तार वन्य जीव संरक्षण की कीमत पर नहीं होना चाहिए।


चंबल अभयारण्य में रिक्त पदों पर हो जल्द तैनाती की अनुशंसा

रिपोर्ट में चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन पर अंकुश के लिए वन विभाग में रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की आवश्यकता बताते हुए कहा कि केवल योजना को मंजूरी मिलना, उपकरण खरीदने का आदेश जारी होना या निर्माण कार्य स्वीकृत हो जाना उसके क्रियान्वयन का प्रमाण नहीं है।

वास्तविक अनुपालन तभी माना जाएगा, जब उपकरण स्थापित होने के बाद काम कर रहे हों। वहां प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात हों और जमीन पर उनके परिणाम दिखाई दें। अवैध खनन रोकने में लगे वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए वन सुरक्षा बल गठित करने के प्रस्ताव पर विचार करने की सिफारिश भी की है।

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