
मनीष शर्मा, मुरैना।
शहर के पं. रामप्रसाद बिस्मिल संग्रहालय में पिछले आठ साल से एक अद्भुत शिवलिंग इस संग्रहालय की शोभा बढ़ा रहा है। 10 फीट ऊंची इस शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही देवों का वास बताया जाता है। खासबात यह है कि 11 वीं सदी की इस शिवलिंग पर हमेशा ही तस्करों की नजर रही। इस शिविर को तीन बार चोरी करने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार प्रशासन ने इस सुरक्षित बचा लिया। एक बार तो प्रशासन, पुलिस के अधिकारियों ने तस्करों पर फायरिंग कर करना पड़ा। तब कहीं जाकर इस अद्भुत शिवलिंग को सुरक्षित किया जा सका। पुरा महत्व की इस शिवलिंग की बाजार में ही कीमत करोड़ों रुपये बताई जाती है। अब इसे संग्रहालय में सुरक्षित कर स्थापित कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि 2007 में ऐंती गांव के जंगलों में वीराने में पड़ी हुई एक शिवलिंग प्रशासन को दिखाई दिया। यह अन्य शिवलिंगो से बिल्कुल ही अलग था। इसका आकार और इस पर की गई नक्काशी अन्य शिवलिंगों की तरह नहीं थी। जिस पर पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने इसे देखा तो बताया कि यह बेहद अद्भुत और दुर्लभ शिवलिंग है। जिसमें ब्रह्म, विष्णु और महेश तीनों को ही शामिल किया गया है। वहीं यह 11 वीं सदी की शिवलिंग होकर पुरामहत्व का भी है। शिवलिंग को तब पंचायत के सुपुर्द कर दिया गया, लेकिन इसी बीच इस शिवलिंग पर तस्करों की नजर पड़ी। जिस पर इसे उठाकर ले जाने लगे।
लेकिन इसी बीच तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी व एसपी हरी सिंह यादव को इसकी सूचना मिल गई। जिस पर पुरातत्व अधिकारी, वन विभाग व पुलिस की टीम ने घेरा डाल दिया। जहां तस्करों के साथ फायरिंग हुई। तब कहीं जाकर इस शिवलिंग को तस्करों के हाथ से बचाया जा सका। इसके बाद दूसरी बार फिर से दो बार इस प्रतिमा को तस्करों ने चोरी करने का प्रयास किया। लेकिन इस शिवलिंग को उठाकर ले नहीं पाए। गांव के बाहर ही इसे छोड़कर भाग गए। तब संग्रहालय का निर्माण नहीं हुआ था। जिसकी वजह से इस गांव में ही रखा गया। जैसे ही यहां संग्रहालय का निर्माण हुआ तो आठ साल पहले इस अद्भुत शिवलिंग को संग्रहालय में स्थापित करा दिया गया। तब से यह संग्रहालय की शोभा बढ़ा रहा है।
शिवलिंग को दुर्लभ इसलिए माना जाता है कि 10 फीट की इस शिवलिंग में तीनों देवों का वास है। पहली नजर में इसमें देवों का वास दिखाई नहीं देता। लेकिन जब इसे जानकार देखते है, तो इसमें तीनों ही दिखाई दे जाएंगे। दरअसल सबसे नीचे के हिस्से में ब्रह्मा है, ब्रह्मा की आकृति चतुर्भजी है। पत्थर को चतुर्भुज के रूप में तराशा गया है। इसके ऊपर ही अष्टभुजी विष्णु हैं। जिसमें पत्थर को आठ कोनों के रूप में तराशा गया है। इसके ऊपर शिवलिंग है। जिसके ऊपर आधा चंद्रमा भी तराशा गया है। बताया जाता है कि यह बेहद दुर्लभ है। ऐसा शिवलिंग शायद ही कहीं पाया गया हो। इसलिए इस पर तस्करों की नजर हमेशा ही बनी रहती है। वहीं अब इसके दर्शन करने भी लोग पहुंचते हैं।
-संग्रहालय में रखा शिवलिंग बेहद दुर्लभ है। ऐसा शिवलिंग आमतौर पर देखने को नहीं मिलता। इसमें ब्रह्मा की चार भुजा, विष्णु की आठ भुजा और शिवलिंग एक ही स्ट्रक्चर में ताराशा गया है। तस्करों ने तीन बार इसे चोरी करने का प्रयास किया है। लेकिन इसे सुरक्षित बचा लिया गया। चमत्कारिक शिवलिंग भी है यह। जहां लोग इसके दर्शन करने पहुंचते है।
अशोक शर्मा, जिला पुरातत्व अधिकारी मुरैना।