
नईदुनिया प्रतिनिधि, नरसिंहपुर। साईंखेड़ा क्षेत्र की दूधी नदी पर लगभग तीन वर्ष पहले करोड़ों रुपये की लागत से बना पुल आज भी एप्रोच रोड के अभाव में धूल फांक रहा है। पुल तो बनकर तैयार हो गया, लेकिन मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। इसके चलते बारिश के दिनों में डेढ़ किलोमीटर का कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि तीन साल पहले पुल बनने से आवागमन सुलभ होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है। बरसात में पुल के दोनों छोर पर भारी कीचड़ और पानी भर जाता है।
दोपहिया वाहन तो दूर, पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं रहता। गर्मी के दिनों में ग्रामीण नदी के बीच में मिट्टी डालकर किसी तरह रास्ता बनाते हैं, लेकिन बारिश आते ही यह संपर्क भी टूट जाता है।
एप्रोच रोड न बनने का सबसे बड़ा खामियाजा पिपरिया और बनखेड़ी की ओर जाने वाले राहगीरों, किसानों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सीधा रास्ता बंद होने के कारण लोगों को 50 से 70 किलोमीटर का लंबा और अतिरिक्त चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों का समय और धन दोनों बर्बाद हो रहा है।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थल निरीक्षण किया जाए और लंबित एप्रोच रोड का पक्का निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि पुल की वास्तविक उपयोगिता सिद्ध हो सके।
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