
नईदुनिया प्रतिनिधि, नीमच। जिले के मनासा कस्बे के बाद नीमच शहर में गिलियन बार्रे सिंड्रोम (जीबीएस) का एक मरीज मिला है। मनासा में अब तक 18 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। जिला मुख्यालय की चावला कालोनी में जीबीएस का एक मामला मिला है, जिसका उदयपुर में इलाज जारी है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है और मनासा में घर-घर सर्वे का दूसरा दौर रविवार से शुरू हो चुका है। इधर, मंदसौर के गरोठ क्षेत्र में एक संदिग्ध मरीज मिला है। उसे इंदौर के निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
मनासा में 13 जनवरी से कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की मानीटरिंग में जीबीएस को लेकर जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग अमला सक्रिय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अलावा स्वास्थ्य विभाग उज्जैन व भोपाल और शासकीय मेडिकल कालेज नीमच की टीमें मनासा में जीबीएस की रोकथाम में जुटी है। मनासा में जीबीएस के अब तक 18 मरीज मिल चुके हैं, जिनमें से दो बच्चों की मौत हो चुकी है।
मनासा बीएमओ डा उमेश बसेर ने बताया कि मनासा में सिर्फ छह मरीजों में जीबीएस की पुष्टि हुई है, जिनमें दो मृतक भी शामिल है। बाकी संदिग्ध हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। नीमच की चावला कॉलोनी में जीबीएस का एक संक्रमित शनिवार रात में सामने आया है, जिसका राजस्थान के उदयपुर में इलाज जारी है। यहां भी जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका का अमला सक्रिय हुआ और संक्रमित व्यक्ति के घर से पानी के सैंपल लिए हैं। अन्य मूलभूत इंतजाम किए हैं। मनासा में अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने बताया कि अब मनासा में स्थिति नियंत्रण में हैं। अब तक सिर्फ छह मरीजों में जीबीएस की पुष्टि हुई है। बाकी को संदिग्ध मानकर बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। शनिवार और रविवार में चार मरीजों को ठीक होने पर डिस्चार्ज किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की 15 टीमों के 90 सदस्यों ने मनासा में 5700 घरों में 29 हजार से अधिक लोगों की जांच की है। जीबीएस संदिग्धों के अलावा अन्य मौसमी बीमारियों से ग्रसित लोगों को इलाज मुहैया कराने के बाद सावधानी बरतने की सलाह दी है। रविवार से घर-घर सर्वे का दूसरा दौर भी शुरू किया जा चुका है।
मनासा में 22 दिसंबर को पहला मरीजा सोनू सहगल आयु 16 वर्ष मिला था। उसे शुरुआत में सर्दी-जुकाम व हाथ-पैर दर्द जैस सामान्य लक्षण थे। जनवरी की शुरुआत में उसे नीमच के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उदयपुर और वहां से अहमदाबाद ले जाते समय 11 जनवरी को मृत्यु हो गई। इसके बाद मनासा में स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। इसके बाद स्वास्थ्य का कहना है कि संक्रमित व संदिग्ध अन्य शहरों में इलाज करा रहे थे, इस कारण स्थानीय स्तर पर जानकारी देरी से मिली।
जीबीएस आटो इम्यून बीमारी है। शुरुआत में सामान्य सर्दी-जुकाम व बुखार के लक्षण सामने आते हैं लेकिन पांच से सात दिन बाद यह इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है। पैरों से शुरुआत होकर यह आंतों और नसों तक पहुंचता है। पैरों में अकड़न के साथ हाथ की अंगुलियां कड़क हो जाती हैं। कई लोग इस लकवा जैसा मानते हैं लेकिन समय पर इलाज के अभाव में जीबीएस से मृत्यु तक हो जाती है।
वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के एक से तीन हफ्ते बाद होती है। फ्लू, डेंगू, कोविड, डायरिया और फूड प्वाइजनिंग इसके ट्रिगर हैं।
बीमारी तब गंभीर हो जाती है, जब यह गले और श्वास की मांसपेशियों पर हमला करती है। ऐसी स्थिति में मरीज कुछ भी निगल नहीं पाता। गले में कफ जमने से मरीज थूक भी नहीं निगल पाता। सांस लेने में परेशानी होती है।
कोई भी संक्रमण इस बीमारी को ट्रिगर कर सकता है, चाहे वह दूषित पानी से ही क्यों न हुआ हो। दो से पांच प्रतिशत मरीजों में ठीक होने के बाद बीमारी दोबारा लौट सकती है। आमतौर पर यह किसी नए संक्रमण के कारण होता है।