मौसम अनुकूल, शिकार भी खूब, नीमच जिले में बढ़ी अजगरों की संख्या, लगातार आ रहे सामने
प्राकृतिक आवास के साथ मौसम की अनुकूलता और शिकार खूब होने से जिले में अजगरों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहीं कारण है कि जिले में हर दिन या लगभग हर दूस...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 06:00:44 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 06:00:44 PM (IST)
नीमच जिले में बड़ी संख्या में पकड़े जा रहे हैं अजगर। (एआई इमेज)HighLights
- जिले के जावद और मनासा विकासखंड में अजगर अधिक
- हर दूसरे दिन ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग करता है रेस्क्यू
- जिले में जंगल और प्राकृतिक आवास बेहतर है
नईदुनिया प्रतिनिधि, नीमच : प्राकृतिक आवास के साथ मौसम की अनुकूलता और शिकार खूब होने से जिले में अजगरों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहीं कारण है कि जिले में हर दिन या लगभग हर दूसरे दिन अजगर दिखाई देते हैं और ग्रामीणोंं की सूचना पर वन विभाग का अमला अजगरों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ता है।
हाल ही में सामने आई घटनाओं का आकलन करें तो जिले के जावद और मनासा विकासखंड में अजगर अधिक संख्या में मिले हैं। नीमच मप्र का सीमावर्ती जिला है। जिला प्राकृतिक रूप से काफी बेहतर है। जिले में जंगल और प्राकृतिक आवास बेहतर है।
जंगल में जंगली सूअर, नीलगाय, सियार सहित अन्य छोटे जानवर भी अधिक संख्या में पाए जाते हैं
जंगल में जंगली सूअर, नीलगाय, सियार सहित अन्य छोटे जानवर भी अधिक संख्या में पाए जाते हैं। जिले का मौसम और जलवायु भी कुछ जीवों के लिए अनुकूल वातावरण का काम करता है। यहीं कारण है कि प्राकृतिक आवास, मौसम की अनुकूलता और पर्याप्त संख्या में भोजन उपलब्ध होने से जिले में अजगरों की संख्या में इजाफा हुआ है।
सितंबर में जावद और मनासा विकासखंड में एक दर्जन से अधिक अजगर दिखाई दिए हैं
वन विभाग के आंकड़ों और ग्रामीणों की माने तो जिले में सितंबर माह में जावद और मनासा विकासखंड में करीब एक दर्जन से अधिक अजगर दिखाई दिए हैं, जिन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया है। सर्वाधिक माने रतनगढ़ और सिंगोली क्षेत्र में सामने आए हैं, यहां सितंबर माह में अब तक 8 बड़े आकार के अजगर पकड़े जा चुके हैं। वन विभाग ने इन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ा है।
नीलगाय के बच्चे का शिकार
सितंबर माह में सिंगोली क्षेत्र के ग्राम रुघनाथपुरा में आठ फीट का एक अजगर पकड़ा गया। रेस्क्यू के दौरान सामने आया था कि अजगर ने नीलगाय के बच्चे का शिकार कर रखा था, जिस कारण वह हिल भी नहीं पा रहा था।
अजगर के लिए अनुकूलता
- उष्ण कंटिबंधीय मौसम होना चाहिए।
- तापमान 24 से 33 डिग्री सेल्सियस के मध्य होना चाहिए।
- प्राकृतिक आवास जंगल अधिक होना चाहिए।
- पानी और दलदलीय क्षेत्र की उपलब्धता होना चाहिए।
- संबंधित क्षेत्र में अजगर के शिकार पर्याप्त होना चाहिए।
जिले के जावद और मनासा क्षेत्र में यह स्थितियां
- जावद, रतनगढ़ और सिंगोली तथा मनासा क्षेत्र में घने जंगल अधिक है।
- जिले के मौसम में पिछले कुछ माह से तापमान 24 से 35 डिग्री सेल्सियस के मध्य बना हुआ है।
- पानी और दलदलीय क्षेत्र पर्याप्त और अधिकांश स्थानों पर उपलब्ध है।
- शिकार के रूप में जंगल सूअर, नीलगाय और सियार आदि प्रचुर मात्रा में हैं।
- जंगली क्षेत्र में मानवों का दखल बेहद कम है। वन विभाग अलर्ट है।
रेस्क्यू के लिए वन विभाग देगा प्रशिक्षण, सूची भी भेजी
जिले में वन जीवों की संख्या बढ़ी है। यहीं कारण है कि वन विभाग ने मौजूदा कर्मचारियों के साथ पूर्व कर्मचारियों और आम नागरिकों को रेस्क्यू के लिए तैयार करने का निर्णय लिया है। वन विभाग के वरिष्ठ कार्यालय से प्रशिक्षण के लिए इच्छुक लोगाें की सूची मांगी गई है, जिसके बाद डीएफओ कार्यालय नीमच से एक सूची भेजी गई है। संभावना है कि इन लोगों को आगामी दिनों में वन विभाग प्रशिक्षण देगा।
यह वन्य जीव भी जिले में
जिले में वन विभाग के आंकलन के अनुसार तेंदुए, लकड़ बग्घे, जंगली सूअर, नीलगाय, अब गांधी सागर अभ्यारण्य क्षेत्र में चीते सहित अन्य वन्य जीव पाए जाते हैं। जलीय जीवों में मगरमच्छ की संख्या भी अधिक है। इनकी सुरक्षा के प्रति वन विभाग का अमला हमेशा चौकस रहता है।
विशेषज्ञ का पक्ष
किसी भी वन्य जीव की संख्या में इजाफा होना एक अच्छा संकेत है। साथ ही यह प्राकृतिक आवास में संबंधित जीव के लिए अनुकूल वातावरण होने का भी संकेत है। जिले में इन दिनों अजगर अधिक दिखाई दे रहे हैं। उनके रेस्क्यू के समाचार मिल रहे हैं। सकारात्मक रूप से जिले में प्राकृतिक आवास, आहार की उपलब्धता और मौसम की अनुकूलता अजगरों की संख्या बढ़ने का कारण हो सकता है। दूसरे रूप में इनके अधिक दिखाई देने का कारण जंगली क्षेत्र में मानव का दखल बढ़ना भी माना जा सकता है। - डॉ. साधना सेवक, सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्राणी शास्त्र नीमच
वन विभाग का पक्ष
जिले में वन विभाग का अमला अलर्ट है। हम वन्य जीवों की सुरक्षा के प्रति सतत् काम करते हैं। जिले में वन्य क्षेत्र और प्राकृतिक आवास अधिक होने से भी वन्य जीव अधिक पाए जाते हैं। अजगरों की संख्या भी पहले की तुलना में अधिक बढ़ी है। जिले के मौसम में अनुकूलता, आहार की उपलब्धता और शिकारी नहीं होना भी इनकी संख्या बढ़ने का कारण है। ग्रामीण क्षेत्रों से सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू करता है। मानव और अजगर दोनों की सुरक्षा करता है। - सरोज सिंह, एसडीओ वन विभाग नीमच