
नईदुनिया प्रतिनिधि, नीमच। आगर मालवा जिले के ग्राम आमला में एमडी की अवैध फैक्ट्री से केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो मप्र की टीम ने तीन आरोपित को हिरासत में लिया है। इन आरोपितों से अवैध फैक्ट्री के संचालन और सप्लाई चैन की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें अंतरप्रांतीय गिरोह का खुलासा होने की संभावना है।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो मप्र को एक गोपनीय सूचना मिली थी कि आगर मालवा जिले के ग्राम आमला में एमडी की अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही है। फैक्ट्री से एमडी की बड़ी खेप की डिलीवरी की जाने वाली है। इस सूचना के बाद सीबीएन की नीमच, उज्जैन और जावरा की संयुक्त टीमों ने 9-10 जनवरी की मध्य रात्रि में ही ग्राम आमला में संबंधित स्थान की घेराबंदी कर दी थी। 10 जनवरी शनिवार सुबह 5 से 10 बजे तक टीम ने अधीक्षक मुकेश खत्री व वीएस कुमार की अगुवाई में चौकसी के साथ तीर्थ हर्बल फार्म हाउस पर निगाह रखी और कोई हलचल नहीं होने पर सुबह 11 बजे दबिश देकर एमडी की अवैध फैक्ट्री पकड़ी।
सीबीएन टीम ने नर्सरी की आड़ में चलाई जा रही एमडी की अवैध फैक्ट्री से 31 किलो 250 ग्राम एमडी व एमडी बनाने में उपयोग होने वाले 600 किलो केमिकल जब्त किए। मौके पर उपकरण भी मिले। कार्रवाई के दौरान टीम ने तीन आरोपितों को अवैध फैक्ट्री से हिरासत में लिया है। इन आरोपितों से एमडी की अवैध फैक्ट्री और एमडी की सप्लाई चैन के संबंध में गहनता से पूछताछ की जा रही है।
ग्राम आमला में सीबीएन टीम ने दबिश दी तो टीम में शामिल अधिकारी व कर्मचारी चौंक गए। यहां महज नाम की नर्सरी व फार्म हाउस था। वास्तविकता में नर्सरी की आड़ में एमडी बनाने की अवैध फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। नर्सरी पूरी तरह से अवैध फैक्ट्री में तब्दील थी, जहां एमडी बनाने के केमिकल से लेकर अत्याधुनिक उपकरण मिले हैं। यह अवैध फैक्ट्री कब से संचालित हो रही थी, इसकी जानकारी भी सीबीएन जुटा रही है।
मालवा क्षेत्र खेती किसानी के लिए पहचाना जाता है लेकिन पिछले तीन माह में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, मप्र पुलिस की नारकोटिक्स विंग और जिला पुलिस बल की कार्रवाई पर निगाह दौड़ाए तो मालवा क्षेत्र के नीमच, मंदसौर, रतलाम के बाद अब आगर मालवा में सिंथेटिक ड्रग एमडी की दस्तक हो चुकी है। नीमच के लसूड़िया ईस्तमुरार व आगर मालवा के आमला में एमडी की अवैध फैक्ट्री पकड़ाई है जबकि मंदसौर व रतलाम जिले में एमडी ड्रग पकड़ने के मामले सामने आए हैं जो कि जांच एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।