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खेतों में बन रही एमडी ड्रग केवल केमिकल का खतरनाक मिश्रण, इसके नुकसान कई गुना ज्यादा

एमडी ड्रग एक निश्चित रासायनिक संरचना वाला पदार्थ है, लेकिन इन अस्थायी लैब में जो बनता है वह हर बार अलग होता है।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 02 Apr 2026 12:03:19 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Apr 2026 12:10:40 PM (IST)
खेतों में बन रही एमडी ड्रग केवल केमिकल का खतरनाक मिश्रण, इसके नुकसान कई गुना ज्यादा
खेतों में इस तहर संसाधन जुटाकर ड्रग बनाई जा रही है।

HighLights

  1. बिना किसी मानक के बन रही ड्रग, हर बार बदल जाता है फार्मूला
  2. राजगढ़, रतलाम, महू में भी पकड़ी गई हैं ड्रग बनाने की फैक्ट्रियां
  3. गुजरात और महाराष्ट्र से केमिकल और कच्चा माल लाकर ड्रग बना रहे

नईदुनिया प्रतिनिधि, नीमच। मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ में सिथेंटिक यानी एमडी (मिथाइलनेडियोक्सी-मेथमफेटामाइन) ड्रग के नाम पर जो कुछ बन रहा है, वह असल में केमिकल का बेहद खतरनाक मिश्रण है। इसका न कोई तय फार्मूला है, न कोई गुणवत्ता।

रतलाम के पिपलोदा थाना क्षेत्र में पोल्ट्री फार्म की आड़ में चल रही फैक्ट्री और इसके पहले राजगढ़, रतलाम, महू आदि स्थानों पर इसकी फैक्ट्रियां पकड़े जाने के बाद इस खतरे की असली तस्वीर सामने आ गई है।

नीमच में 25 वर्षीय नरेश अशोक चेतानानी की बीते दिनों हुई संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद स्वजन अब कह रहे हैं कि एमडी ड्रग के नाम पर बिकने वाले जहरीले केमिकल मिश्रण ने उनके बेटे की जान ली। पिछले दिनों पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में सामने आया कि तस्कर फर्टिलाइजर और कीटनाशक बनाने के नाम पर गुजरात और महाराष्ट्र से केमिकल और कच्चा माल लाकर एमडी ड्रग बना रहे थे।

एमडी ड्रग बनाया जा रहा है

रतलाम में पकड़े गए मुख्य आरोपित जमशेद उर्फ सेठ को ड्रग की दुनिया में 'डॉक्टर' के नाम से जाना जाता है क्योंकि वह दूसरों को एमडी ड्रग बनाने का प्रशिक्षण भी देता था। यही इसकी भयावहता बता रहा है कि यह उद्योग किस तरह फैल रहा है- न प्रयोगशाला, न विशेषज्ञता, बस इंटरनेट पर विधि देखकर जुगाड़ के केमिकल और सुनसान खेत या पोल्ट्री फार्म पर कथित एमडी ड्रग बनाया जा रहा है।


हर बार अलग जहर, यही सबसे बड़ा खतरा

एमडी ड्रग एक निश्चित रासायनिक संरचना वाला पदार्थ है, लेकिन इन अस्थायी लैब में जो बनता है वह हर बार अलग होता है। एमडी के नाम पर बिकने वाले पदार्थों में केटामाइन, एम्फेटामाइन, सिंथेटिक कैथिनोन यानी 'बाथ साल्ट्स' और मेथाम्फेटामाइन जैसे खतरनाक पदार्थ मिले पाए गए हैं। इसका सीधा असर यह है कि हृदय, किडनी और लिवर पर एक साथ हमला होता है। ओवरडोज से हार्ट फेलियर, दौरे और मानसिक दुष्प्रभाव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

केमिकल से जुड़े नियमों को और सख्त करे सरकार

पीएम एक्सीलेंस कालेज, नीमच के रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. बालकृष्ण दानगढ़ कहते हैं कि एमडी बनाने वाले अपराधी प्रवृत्ति के लोग हैं जिन्हें केमिकल के उपयोग और उनके नुकसान की कोई जानकारी नहीं होती। ऐसे में परिणाम खतरनाक हो सकते हैं। शासन को केमिकल संबंधित नियमों को और कड़ा बनाना चाहिए।

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