
नईदुनिया प्रतिनिधि, पन्ना: पन्ना से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर सरकार किसानों के हितों की बात करती है, वहीं गुनौर अनुविभागीय कार्यालय में एक किसान ने अपने गले में फांसी का फंदा डालकर न्याय की गुहार लगाई। इस घटना ने वहां मौजूद कर्मचारियों में हड़कंप मचा दिया।
ग्राम कटरा के निवासी किसान सोनू रजक का आरोप है कि एनएच-943 बाईपास निर्माण के दौरान उनकी कीमती सिंचित भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में 'असिंचित' दर्शाकर मुआवजे में बड़ा खेल किया गया है। इसके अलावा, किसान का कहना है कि उनकी जमीन पर स्थित कुआं कागजों से गायब कर दिया गया है। बार-बार आवेदन देने के बावजूद जब अधिकारियों ने उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो हताश होकर इस अन्नदाता को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
दफ्तर में फंदा डालकर पहुंचे किसान को देखकर अधिकारियों में हड़कंप मच गया। यह घटना गंभीर सवाल उठाती है कि आखिर एक किसान को अपनी जायज मांग के लिए मौत को गले लगाने की चेतावनी क्यों देनी पड़ रही है? क्या प्रशासन इस 'कागजी धांधली' को सुधार कर किसान को उसके उचित हक दिला पाएगा?
इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि किस प्रकार किसान अपनी समस्याओं के समाधान के लिए परेशान हो रहे हैं। सोनू रजक की यह स्थिति उन हजारों किसानों की कहानी बयां करती है, जो अपनी जमीन और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
किसान की इस आत्मघाती चेतावनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक प्रशासनिक तंत्र में सुधार नहीं होगा, तब तक किसानों की समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी। यह घटना एक गंभीर संकेत है कि किसानों की आवाज को सुनने की आवश्यकता है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
इस प्रकार की घटनाएं न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंताजनक हैं। यह समय है कि सरकार और प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से विचार करें और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं। क्या प्रशासन इस स्थिति को सुधारने में सक्षम होगा, यह देखना अब बाकी है।