
नईदुनिया न्यूज, पन्ना/अजयगढ़। केन-बेतवा परियोजना सहित विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास के सवाल पर चिता आंदोलन तेज होता जा रहा है। 28 दिन का आमरण अनशन समाप्त कर आंदोलन स्थल लौटे अमित भटनागर के साथ प्रभावित परिवारों की लामबंदी बढ़ी है।
इसी बीच जेल में बंद महिला आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार ने जमानत लेने से इनकार कर दिया। उनसे मिलने पहुंचे पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात और अमित भटनागर से दिव्या ने कहा कि वह जेल में रहकर ही न्याय की लड़ाई जारी रखेंगी।
सांसद वृंदा करात मंगलवार को अमित भटनागर के साथ जिला जेल में दिव्या से मिलीं। दिव्या ने आरोप लगाया कि आदिवासियों और किसानों के हित में कानून की बात उठाने के कारण उन्हें निर्दोष होने के बावजूद जेल भेजा गया। उन्होंने गिरफ्तारी के तरीके, पुलिस हिरासत में कथित प्रताड़ना, मेडिकल परीक्षण नहीं कराने और बयान दर्ज नहीं करने पर सवाल उठाए।
दिव्या ने कहा कि उनकी विधवा मां गुहार लगाती रहीं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा कि अब वह जेल के भीतर रहकर न्याय की आवाज उठाएंगी।
24 अक्टूबर को पन्ना में संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ रैली और कलेक्ट्रेट घेराव में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, झाबुआ विधायक और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया सहित कई नेताओं ने रैली में हिस्सा लिया।
अगले दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी अमित भटनागर और प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। आंदोलनकारियों का कहना है कि आमरण अनशन स्थगित हुआ है, संघर्ष नहीं। न्याय, उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन के 46वें दिन आक्रोश रैली निकाली गई। साथ ही केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित पन्ना जिले के आठ गांवों के विस्थापित परिवारों की खटिया चौपाल हुई। परिवारों ने मुआवजे, पुनर्वास, कानूनी प्रक्रियाओं और अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए।
उनका आरोप है कि वर्षों से बसे गांवों को पुलिस बल के सहारे उजाड़ा गया और उन्हें पर्याप्त न्याय नहीं मिला। चौपाल में वृंदा करात ने भाजपा सरकार और पन्ना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
वृंदा करात ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी परिवारों को उजाड़ना और उनके अधिकारों की अनदेखी करना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आंदोलन को भोपाल से राष्ट्रीय स्तर तक समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई।
विस्थापितों की समस्याओं और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों के संबंध में वृंदा करात ने पुलिस अधीक्षक से मिलने का प्रयास किया। एसपी उपलब्ध नहीं थे, इसलिए उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना चौहान को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद वृंदा करात और अमित भटनागर ने नवागत कलेक्टर हर्ष सिंह से मुलाकात की।
ज्ञापन में केन-बेतवा, रुंझ बांध और ललितपुर-सिंगरौली रेलमार्ग सहित विभिन्न परियोजनाओं में कथित गैरकानूनी बेदखली, नियमों के उल्लंघन, मुआवजे और पुनर्वास के सवालों के साथ आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों का उल्लेख किया गया। उन्होंने प्रभावितों के अधिकारों की रक्षा और शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
आंदोलन को समर्थन देने सिंगरौली की महापौर एवं आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल, प्रदेश संगठन मंत्री जितेंद्र चौरसिया, अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और हाईकोर्ट के अधिवक्ता रामनारायण कुरारिया के आंदोलन स्थल पहुंचने का कार्यक्रम है।
रैलियों, विस्थापित परिवारों की भागीदारी और नेताओं के समर्थन के बीच दिव्या के जमानत नहीं लेने के फैसले ने आंदोलन को नया मोड़ दिया है।