नईदुनिया प्रतिनिधि, पन्ना। रैपुरा तहसील के ग्राम बम्होरी में पिछले एक सप्ताह से गांव में सैकड़ो ग्रामीण का स्वास्थ्य एकाएक खराब होने लगा कई लोग गांव में सर्दी, जुखाम, बुखार उल्टी दस्त से ग्रसित हो चुके थे लेकिन क्षेत्रीय स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठा हुआ था। इस कारण से यह एक संक्रमण समूची गांव में फैल गया।
संक्रमण ने महामारी का रूप ले लिया, जब लगातार लोग बीमार पढ़ने लगे जिले के स्वास्थ्य विभाग की नींद तब टूटी जब विगत दो दिनों में पाँच लोगों की मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, सेवक उम्र 32 वर्ष, राधाबाई उम्र 30, कंछेदी उम्र 45, मंसो उम्र 16 और मुन्नीबाई उम्र 60 की अचानक हुई मौत हो गई, जिसके बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है बना हुआ है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ग्रामीण सात दिनों से लगातार बीमार पड़ रहे थे, लेकिन स्वास्थ्य अमला आंख मूंदे बैठा रहा।
गांव में इस वक्त 40 से 50 लोग बीमारी की चपेट में बताए जा रहे हैं। कौन सी बीमारी के कारण पांच लोगों की मौत हुई है इसकी भी स्वस्थ विभाग ने अभी तक कोई पुष्टि नही की। वहीं, पिछले तीन दिनों में ही करीब 25 से 30 लोग अचानक बीमार पड़े। हालात बिगड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम बम्होरी पहुंची। सीएमएचओ पन्ना डॉ. राजेश तिवारी स्वयं मौके पर पहुंचे और घर-घर जाकर सैंपल लिए, साथ ही बीमारों को दवाइयां उपलब्ध कराईं।
ग्रामवासियों का कहना है कि वे सात दिनों से बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन न तो बीएमओ और न ही स्थानीय स्वास्थ्य अमले ने सुध ली। अब जब मौतें हो चुकी हैं तब प्रशासन हरकत में आया है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने दिनों तक जिम्मेदार अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी।
याद दिला दें कि पिछले वर्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पवई के अंतर्गत ग्राम पटोरी में उल्टी-दस्त के कारण सात मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद विभाग नहीं चेता और अब बम्होरी में दो दिन के भीतर पाँच लोगों की मौत ने स्वास्थ्य अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामवासियों का साफ कहना है कि अगर समय रहते ध्यान दिया जाता तो इन मौतों को रोका जा सकता था। विभाग की लापरवाही ने पांच परिवारों को अपनों से छीन लिया। फिलहाल टीम गांव में डेरा डाले हुए है और बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए जांच और उपचार का काम कर रही है।
बारिश के मौसम के बाद अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी के कारण कई बार इस प्रकार की घटना प्रकाश में आती है । क्योंकि अमूमन ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग आज भी लोग तालाब बावड़ी के पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं जिस कारण से लोग बीमार पड़ते हैं।
लंबे समय तक अगर उचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण जान का भी खतरा बड़ जाता है, लेकिन इन सब घटनाक्रमों से ना तो कभी स्वास्थ्य विभाग कोई सीख लेता है ना ही बारिश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में जिला प्रशासन के द्वारा कुएं तालाब बावड़ियों में ना तो कभी दवाइयां का छिड़काव करवाया जाता है। इस वजह से पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है और लोग उसी दूषित पानी का उपयोग कर बीमारी का शिकार बन जाते है।
वहीं, ऐसे में सीधे तौर पर जिला प्रशासन पन्ना की यह लापरवाही है स्पष्ट नजर आती है की आखिर क्यों पहले से जमीनी स्तर पर कोई ऐसे ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं जिससे इस प्रकार की मौतों की सूचना ग्रामीण क्षेत्र से ना आ सके ।