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MP में मिला दुर्लभ कछुआ, तस्करी के चलते है हाई डिमांड; वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

भारतीय तारा कछुआ के नाम से जानी जाती है, जो कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित और संकटग्रस्त प्रजाति है।

By Ajay GolhaniEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Mon, 18 May 2026 04:42:31 PM (IST)Updated Date: Mon, 18 May 2026 04:47:40 PM (IST)
MP में मिला दुर्लभ कछुआ, तस्करी के चलते है हाई डिमांड; वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
MP में मिला दुर्लभ कछुआ

HighLights

  1. खेत में मिला दुर्लभ भारतीय तारा कछुआ
  2. वन विभाग ने सुरक्षित संरक्षण में लिया कछुआ
  3. अवैध तस्करी से घट रही कछुओं की संख्या

नईदुनिया प्रतिनिधि, देवेंद्रनगर/पन्ना। उत्तर वन मंडल पन्ना के बीट देवेंद्रनगर के वार्ड क्रमांक 12 निवासी महेंद्र प्रजापति के खेत में एक अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का कछुआ दिखाई दिया। यह प्रजाति भारतीय तारा कछुआ के नाम से जानी जाती है, जो कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित और संकटग्रस्त प्रजाति है।

कछुए को अपने संरक्षण में लिया।

महेंद्र प्रजापति ने इसकी सूचना सीबीएमओ डॉ. अभिषेक जैन को दी। जिसकी सूचना वन विभाग के बीट प्रभारी शारदा प्रसाद राय को दी गई। वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और विधिवत पंचनामा तैयार कर कछुए को अपने संरक्षण में लिया।


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बेहद सुंदर कछुआ

गौरतलब है कि भारतीय तारा कछुआ भारत में पाया जाने वाला एक बेहद सुंदर कछुआ है, जिसकी पीठ पर तारे जैसी पीली धारियां बनी होती हैं। इसी वजह से इसे “स्टार टॉर्टॉइज़” कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम जियोक्लोन एलिगेंस है। इसका आवास सूखे घास के मैदान, झाड़ीदार क्षेत्र और जंगल हैं। भारत में यह मध्य भारत, दक्षिण भारत और राजस्थान के कुछ हिस्सों में पाया जाता है।

तारे जैसा डिजाइन

इनका भोजन घास, पत्तियां, फल और फूल हैं। यह लगभग 30–50 वर्ष तक जीवित रह सकता है। इसकी खोल पर बना तारे जैसा डिजाइन इसे बहुत आकर्षक बनाता है। यह शांत स्वभाव का होता है और धीरे चलता है। अवैध तस्करी के कारण इसकी संख्या घट रही है।

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इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के अनुसार यह प्रजाति संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत इसे सुरक्षा प्राप्त है।

इस कार्रवाई में बीट प्रभारी शारदा प्रसाद राय, वन सुरक्षा श्रमिक रघुवीर सिंह, विश्राम सिंह, राजेश यादव, रामसिंह एवं अन्य स्टाफ उपस्थित रहे।

अधिकारियों का क्या कहना है

यदि किसी भी स्थान पर दुर्लभ या जंगली प्राणी दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत वन विभाग को देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इससे न केवल वन्यजीवों का जीवन सुरक्षित होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होता है। महेंद्र प्रजापति के द्वारा एक संकटग्रस्त जीव का जीवन सुरक्षित किया गया।

डॉ. अभिषेक जैन, सीबीएमओ देवेंद्रनगर

वन विभाग को सूचना मिली थी कि एक दुर्लभ कछुआ खेत पर मिला है। मौके पर वन विभाग के स्टाफ को भेजकर संरक्षित प्रजाति के कछुए को संरक्षण में लिया गया।

शुभम तिवारी, वन परिक्षेत्राधिकारी, देवेंद्रनगर

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