
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायसेन/बेगमगंज। गैरतगंज तहसील के ग्राम सगोर में पानी भरने के दौरान कुएं में डूबने से तीन आदिवासी मासूम बच्चियों की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही और पेयजल संकट का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
कॉमरेड राहुल भायजी ने मीडिया से चर्चा में आरोप लगाया कि जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। गांवों में नलजल योजनाएं और हैंडपंप कागजों में संचालित दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि सगोर गांव में यदि समय पर पेयजल व्यवस्था होती और जलस्रोत चालू रहते, तो तीन मासूम बच्चियों की जान नहीं जाती। ग्रामीणों को मजबूरी में खेतों के कुओं से दूषित पानी भरना पड़ रहा है, जिससे हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
जिले की गैरतगंज तहसील अंतर्गत पुलिस चौकी गढ़ी के ग्राम सगोर में बेहद दर्दनाक हादसे में तीन मासूम बच्चियों की कुएं में डूबने से मौत हो गई थी।
शनिवार सुबह करीब 11 बजे ग्राम सगौर निवासी कुमारी राधा पिता हल्केराम आदिवासी उम्र लगभग 12 वर्ष, कुमारी अमृता पिता रामगोपाल आदिवासी उम्र लगभग 12 वर्ष तथा कुमारी तनु पिता हल्केराम आदिवासी उम्र लगभग 13 वर्ष गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं पर पानी भरने गई थीं।
पानी भरने के दौरान बच्चियां कुएं में नहाने लगीं। इसी दौरान एक बच्ची का संतुलन बिगड़ गया और उसे बचाने के प्रयास में अन्य दोनों बच्चियां भी कुएं में उतर गईं। देखते ही देखते तीनों गहरे पानी में डूब गईं।
घटना के समय साथ में मौजूद एक अन्य बच्ची अमीना घबराकर गांव पहुंची और ग्रामीणों को हादसे की जानकारी दी। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी प्रयासों के बाद तीनों बच्चियों को कुएं से बाहर निकाला गया।
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राहुल भायजी ने शासन-प्रशासन और पीएचई विभाग को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए मृत बच्चियों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
इधर, कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने गांव पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक पीड़ित परिवारों को कोई ठोस राहत नहीं मिली है और न ही लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।