
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़। आधुनिक समाज और मजबूत कानूनों के बावजूद, मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सामाजिक रूढ़िवादिता का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक स्थानीय जाति पंचायत (खाप) उन परिवारों को प्रताड़ित कर रही है जिनके बच्चों ने अपनी मर्जी से दूसरे समाज में विवाह किया है। देश का कानून हर बालिग नागरिक को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है और सरकार अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए दो लाख रुपये तक की आर्थिक मदद भी देती है। इसके विपरीत, यहां का कुशवाहा समाज ऐसे प्रेम विवाहों पर भारी जुर्माना और पूर्ण बहिष्कार जैसे कड़े नियम थोप रहा है।
सामाजिक बहिष्कार का डर इस कदर हावी है कि बेबस माता-पिता अपनी ही संतानों को हमेशा के लिए त्यागने का कानूनी हलफनामा (एफिडेविट) देने को मजबूर हैं। अकेले ब्यावरा शहर में ही करीब 8 से 10 परिवार इस अमानवीय प्रताड़ना का शिकार हैं। दंड की रकम चुकाए बिना उन्हें किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में कदम रखने की अनुमति नहीं दी जाती।
इस कुप्रथा के कारण परिवार भयानक मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। हाल ही में पुलिस थाने में एक दादा को रोते हुए देखा गया, जो अपनी पोती से मिन्नतें कर रहे थे कि वह अभी घर लौट चले और बालिग होने पर कोर्ट मैरिज कर ले, ताकि परिवार 50 हजार रुपये के जुर्माने और हुक्के-पानी बंद होने की सजा से बच सके। वहीं एक अन्य मामले में, एक लाचार पिता ने पुलिस से लिखित में यह दर्ज करने की गुहार लगाई कि उसका अपनी बालिग बेटी से कोई रिश्ता नहीं बचा है, क्योंकि समाज उन्हें जीने नहीं देगा।
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इस रूढ़िवादी व्यवस्था का बचाव करते हुए कुशवाहा समाज के अध्यक्ष शिव कुशवाहा ने तर्क दिया है कि समाज की व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे प्रतिबंध जरूरी हैं। हालांकि, प्रशासन ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। राजगढ़ के कलेक्टर डॉ. गिरीश मिश्रा ने साफ किया है कि ऐसे गैर-कानूनी फैसलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस प्रशासन के सहयोग से समाज के प्रतिनिधियों को बुलाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इन मनमाने सामाजिक फरमानों को पूरी तरह खारिज कराया जाएगा।