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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 15, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Navratri 2023: 550 साल पहले चबूतरे पर स्थापित की थी माता की प्रतिमा, आज बन चुका है भव्य मंदिर

Navratri 2023: भील राजाओं द्वारा 550 वर्ष सिद्धपीठ मां जालपा प्रतिमा की स्थापना की गई थी। अब यहां भव्‍य मंदिर बन चुका है।

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Sun, 15 Oct 2023 02:29:56 PM (IST)Updated Date: Sun, 15 Oct 2023 02:29:56 PM (IST)
Navratri 2023: 550 साल पहले चबूतरे पर स्थापित की थी माता की प्रतिमा, आज बन चुका है भव्य मंदिर
राजगढ़ में स्‍थापित सिद्धपीठ जालपा माता का मंदिर

HighLights

  1. सिद्धपीठ जालपा माता की प्रतिमा है स्थापित
  2. भील राजाओं ने चबूतरे पर स्थापित की थी प्रतिमा
  3. 550 साल पहले स्‍थापित हुई थी प्रतिमा

Navratri 2023 नवदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़। जिला मुख्यालय पर पहा़ड़ी पर करीब 550 साल पहले सिद्धपीठ जालपा माता की मूर्ति को एक छोटे से चबूतरे पर स्थापित किया था। लेकिन समस के साथ यहां बदलाव होता चला गया और आज मातारानी भव्य मंदिर में विराजमान है। भील राजाओं द्वारा सिद्धपीठ मां जालपा जी की स्थापना की गई थी।

जानकार लोग बताते हैं कि राजगढ़ पर पहले भील राजाओं का राज हुआ करता था। उन्हीं के द्वारा पहाड़ी पर एक चबूतरे पर माता रानी की स्थापना की गई थी। तब से लेकर सालों तक पहाड़ी पर चबूतरे पर माता रानी विराजमान रही। बाद में यहां पर प्रशासन के सहयोग से मंदिर को ट्रस्ट घोषित किया गया। ट्रस्ट बनने के बाद मंदिर पर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग, सीढ़ियां आदि बनाई गई। इतना ही नहीं, मंदिर पर निर्माण होने के साथ ही पेयजल और सामुदायिक भवन आदि के इंतजाम किए। अब यहां पर मंदिर पहुंचने के लिए नेशनल हाइवे से मंदिर तक दोगुना चौड़ा रोड भी बनाकर तैयार किया जा रहा है। जो भक्तों के लिए सुविधाजनक साबित होगा।


वर्तमान में यहां पर नवरात्र के दौरान हजारों की संख्या में यहां दर्शन करने के लिए भक्तगण पहुंचते हैं। यहां पर जिले ही नहीं बल्कि राजस्थान सहित दूर-दूर से भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा भैंसवा माता मंदिर, बटेरी माता मंदिर राजगढ़, वैष्णोदेवी मंदिर सुठालिया, मऊ स्थित माता मंदिर, ब्यावरा डिपो परिसर स्थित माता मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों पर भक्तों का सैलाब उमड़ता हुआ नजर आएगा।

पाती रखने के साथ होते हैं विवाह

सिद्धपीठ जालपा माता मंदिर की सिद्धि इतनी है कि जब भी किसी के शादी-विवाह के लिए मुहुर्त नहीं निकलते हैं तो मातारानी के दरबार में पाती रखने के साथ विवाह संपन्न किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां की पाती बिना किसी मुहूर्त का शुभ मुहूर्त होता है। शादी करने के बाद जरूर दोनों पक्षों के लोग दूल्हा-दुल्हन सहित यहां मातारानी के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इनके अलावा भी जिलेभर से शादियों के दौरान यहां दर्शन करने वालों की भी़ड लगी रहती है।

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यहां पर भक्तों द्वारा अपने काम पूरे करवाने के लिए माता रानी के दरबार में स्वस्तिक बनाने के साथ ही पत्थरों के मकान भी बनाए जाते हैं। भक्तों द्वारा मंदिर की दीवारों पर हजारों की संख्या में स्वास्तिक बना रखे हैं। जबकि मंदिर के आसपास व पहा़ड़ी पर ब़डी संख्या में कार्य सिद्ध होने की मांग को लेकर स्वस्तिक भी बनाए जाते हैं।