
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की रामभक्ति पर उन्हें न पहले विश्वास था, न आज है, क्योंकि अयोध्या के संतों ने वर्ष 1993 में ही राम मंदिर के चंदे में गड़बड़ी की शिकायत की थी। दिग्विजय के अनुसार, विहिप के लोग रामभक्ति के नाम पर केवल चंदा उगाहने में लगे थे। करीब 1400 से 1500 करोड़ रुपये एकत्रित हुए थे, जबकि विहिप ने केवल 8.29 करोड़ रुपये बताए थे।
यह आरोप दिग्विजय ने शनिवार को राजगढ़ में लगाया। सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के साथ पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने भगवान रामदेवजी मंदिर परिसर में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि पीवी नरसिंह राव के प्रधानमंत्री रहते बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तब राव ने विवादित ढांचे से अलग करीब 67 एकड़ शासकीय जमीन का अधिग्रहण कर राम मंदिर के लिए आरक्षित की थी। जमीन का हस्तांतरण होना था, लेकिन इसी दौरान हुए आम चुनाव के बाद राव प्रधानमंत्री नहीं रहे। आने वाली सरकारों ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया।
दिग्विजय ने वोट चोरी और अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को जोड़ते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पदाधिकारी रहते चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने मिलकर भ्रष्टाचार किया। ज्ञानेश कुमार भी चंदे में गड़बड़ी सामने आने से तीन दिन पहले तक राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य थे।
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मध्य प्रदेश से हरदीप सिंह पुरी के राज्यसभा नामांकन के सवाल पर दिग्विजय ने कहा कि पुरी के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अच्छे संबंध हैं। जेफरी एपस्टीन से उनकी मुलाकातों वाली तस्वीर और दस्तावेजों के जरिए मोदी सरकार की ब्लैकमेलिंग की जा रही है।