
विवेक बाफना - माधवसिंह कछावा, नईदुनिया, रतलाम/सिमलावदा : जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर लगभग छह हजार आबादी वाले सिमलावदा गांव में हायर सेकेंडरी स्कूल शुरू होने के बाद शिक्षा की तस्वीर बदल गई है। वर्ष 2015 से पहले गांव में केवल हाईस्कूल तक पढ़ाई होती थी। दसवीं के बाद अधिकांश विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ देते थे। उस समय दसवीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 100 से 150 के बीच थी, लेकिन इनमें से केवल 20 से 30 विद्यार्थी ही आगे की पढ़ाई के लिए जाते थे। बालिकाओं की संख्या इनमें नगण्य रहती थी।
वर्ष 2015 में गांव में हायर सेकेंडरी स्कूल शुरू होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी। शुरुआत में यह संख्या 150 से बढ़कर 250 हुई और अब स्कूल में 500 से अधिक बालक-बालिकाएं अध्ययनरत हैं। खास बात यह है कि इनमें बालिकाओं की संख्या भी लड़कों के लगभग बराबर पहुंच गई है। इस वर्ष स्कूल में कृषि संकाय भी शुरू हुआ है। इससे शिक्षा सत्र 2027-28 में विद्यार्थियों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
हायर सेकेंडरी की पढ़ाई के लिए पहले विद्यार्थियों को 12 किलोमीटर दूर बदनावर अथवा रतलाम जाना पड़ता था। ग्रामीण क्षेत्र में बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावक उन्हें गांव से बाहर भेजने में हिचकते थे। यही कारण था कि पहले हर वर्ष केवल चार-पांच बालिकाएं ही बदनावर पढ़ने जाती थीं।
अब गांव में ही 12वीं तक पढ़ाई उपलब्ध होने से बालिकाओं की संख्या करीब ढाई सौ तक पहुंच गई है। आसपास की छह पंचायतों सुजलाना, बिरमावल, रत्तागढ़खेड़ा, रत्तागिरी और सरवड़ सहित क्षेत्र के विद्यार्थी भी स्कूल में पढ़ने आते हैं। करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र तक के बच्चों के लिए स्कूल शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया है।
स्कूल मिलने के साथ ग्रामीणों ने भी बच्चों के भविष्य और संस्थान के विकास की जिम्मेदारी संभाली। स्कूल विकास समिति बनाकर स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ वाटर, शिक्षकों की उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम, फर्नीचर, पौधारोपण, एलसीडी और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी लगाए गए।
वर्तमान में 26 कैमरों की प्राचार्य कक्ष से स्कूल की गतिविधियों की निगरानी की जाती है। गांव के युवाओं ने समिति के माध्यम से तीन लाख रुपये से अधिक खर्च कर स्कूल और विद्यार्थियों के विकास में योगदान दिया है। अब पुस्तकालय बनाने की तैयारी है। प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद काम शुरू होगा। स्कूल विकास समिति अध्यक्ष मोहन बेकड़ा ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई को लेकर गांव के युवा सक्रिय हैं और आगे भी जनसहयोग जारी रहेगा।
इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 11 विद्यार्थियों को शासन की योजना के तहत लैपाप और दो विद्यार्थियों को स्कूटी मिली है। लैपटाप की राशि विद्यार्थियों के खातों में पहुंच चुकी है, जबकि स्कूटी जल्द मिलेगी। योजना शुरू होने से अब तक करीब 45 विद्यार्थियों को लैपटाप और आठ बच्चों को स्कूटी मिल चुकी है।
वर्ष 2021-22 में एक ही बोर्ड परीक्षा में 20 विद्यार्थियों को लैपटाप मिले थे। पूर्व में दसवीं में मेरिट में आने वाले विद्यार्थी को एग्रीकल्चर कंपनी तथा 12वीं में उच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को सरपंच लीलाबाई-बंशीलाल पाटीदार ने टैबलेट देकर सम्मानित किया था। इस बार भी दसवीं और 12वीं में मेरिट में आने वाले एक-एक विद्यार्थी को जनप्रतिनिधियों द्वारा टैबलेट देकर सम्मानित किया जाएगा।