
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा रविवार को आयोजित राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) के दौरान रतलाम के एक परीक्षा केंद्र पर सिख छात्रा की पगड़ी और कृपाण उतरवाने को लेकर विवाद हो गया। सागोद रोड स्थित उत्कृष्ट स्कूल केंद्र पर हुई इस घटना के बाद सिख समाज के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई। सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिस मौके पर पहुंचे और अज्ञानतावश हुई घटना पर खेद जताते हुए माफी मांगी, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
जानकारी के अनुसार, परीक्षा दोपहर 12 से 3 बजे तक आयोजित की गई थी। रतलाम जिले में कुल 16 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। सागोद रोड स्थित उत्कृष्ट स्कूल में परीक्षा से पूर्व अभ्यर्थियों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से परीक्षा देने आई अमृतधारी छात्रा गुर्लिन कौर को महिला स्टाफ द्वारा अलग कक्ष में ले जाकर जांच की गई। इस दौरान उनकी पगड़ी (दुमाला साहेब) और कृपाण उतरवा ली गई। छात्रा के साथ रतलाम में रहने वाले उनके स्वजन वीरेंद्र सिंह भी केंद्र पर आए थे। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने समाज के अन्य लोगों को सूचना दी, जिसके बाद सिख समाज के कई प्रतिनिधि केंद्र पर पहुंच गए।
सूचना मिलते ही सिख समाज के अवतार सिंह सलूजा, कंवल जीत सिंह मक्कड़, कश्मीर सिंह सोढ़ी, देवेंद्र सिंह बग्गा एवं सतपाल सिंह डंग सहित अन्य लोग केंद्र पहुंचे। उन्होंने केंद्राध्यक्ष एवं स्कूल प्रिंसिपल सुभाष कुमावत के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। मौके पर एसडीएम आर्ची हरित, ग्रामीण एसडीएम विवेक सोनकर, सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया, नायब तहसीलदार मनोज चौहान तथा डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव भी उपस्थित रहे। समाजजनों ने कहा कि परीक्षा संबंधी निर्देशों में पगड़ी उतरवाने का उल्लेख नहीं है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने जांच करने वाली शिक्षिका पर कार्रवाई की मांग की।
छात्रा की रतलाम में रहने वाली रिश्तेदार रंजीत कौर ने कहा कि छात्रा सुबह से तैयारी कर परीक्षा देने आई थी, लेकिन चेकिंग के दौरान दुमाला उतरवाया गया, जो सिख परंपरा के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं सिख समाज के साथ ही क्यों होती हैं, इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
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परीक्षा के बाद बाहर आई छात्रा गुर्लिन कौर ने बताया कि परीक्षा से पहले दस्तार खोलकर जांच की गई और कृपाण भी निकलवाई गई। यह सिख परंपरा का हिस्सा है और वह इसे पालन करती हैं। पूर्व में राजस्थान में कई परीक्षाएं दीं, लेकिन कभी ऐसी स्थिति नहीं आई। परीक्षा केंद्राध्यक्ष एवं स्कूल प्रिंसिपल सुभाष कुमावत ने कहा कि आयोग के निर्देशानुसार जांच की गई। अज्ञानतावश यह घटना हो सकती है। दोहरी पगड़ी की परंपरा की जानकारी स्टाफ को नहीं थी। यदि किसी की भावना आहत हुई है तो वह माफी मांगते हैं।
आयोग द्वारा सूक्ष्म जांच के निर्देश दिए गए थे। चेकिंग के दौरान किसी की धार्मिक भावना आहत करने का उद्देश्य नहीं था। स्टाफ को भविष्य में सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है। प्रशासन की ओर से खेद प्रकट किए जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई। - विवेक सोनकर, ग्रामीण एसडीएम