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पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई से संपर्क का हवाला देकर डराया, रतलाम में डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग से 55 लाख की साइबर ठगी

माणकचौक थाना क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट कर 66 वर्षीय बुजुर्ग से 55 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करने...और पढ़ें

By Jaydeep GurjarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 08:24:05 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 08:24:05 PM (IST)
पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई से संपर्क का हवाला देकर डराया, रतलाम में डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग से 55 लाख की साइबर ठगी
डिजिटल अरेस्ट कर की ठगी। (एआई इमेज)

HighLights

  1. पुलिस और एटीएस अधिकारी बन धमकाया
  2. मोबाइल फोन और वाट्सएप वीडियो कॉल से दबाव बनाया
  3. दो दिन में 55 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए

नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम : माणकचौक थाना क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट कर 66 वर्षीय बुजुर्ग से 55 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है।

कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करने वाले बुजुर्ग को ठगों ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट से संपर्क और मनी लान्ड्रिंग के मामले में फंसने का भय दिखाया। खुद को पुलिस और एटीएस अधिकारी बताकर लगातार मोबाइल फोन और वाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से दबाव बनाया और दो दिन में 55 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

अपनी निजी जानकारी साझा कर दी

स्वजनों की सतर्कता और साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से ठगी की राशि में से 15 लाख रुपये फ्रीज करवाए गए, जबकि 20 लाख रुपये की अतिरिक्त ठगी समय रहते रोक ली गई। ठगों ने पहले बुजुर्ग से पूछा था कि क्या वह नौकरी से रिटायर्ड हैं। उनके मना करने के बाद भी उन्होंने अपनी निजी जानकारी साझा कर दी।


कुवैत में ही निवास करते हैं और जुलाई में रतलाम आए थे

साइबर प्रभारी जीवन बारिया ने बताया कि पीड़ित कुवैत में ही निवास करते हैं और जुलाई में रतलाम आए थे। 15 सितंबर को अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र के कोलाबा का पुलिस इंस्पेक्टर बताते हुए पीड़ित के मोबाइल नंबर, व्यवसाय और भारत में रहने संबंधी जानकारी पूछी। इसके बाद एक अन्य मोबाइल नंबर के बारे में पूछताछ करते हुए दावा किया कि वह नंबर पीड़ित के नाम पर जारी हुआ है और उससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एजेंट से संपर्क किया गया है।

अलग-अलग नंबरों से फोन और वॉट्सएप वीडियो कॉल किए गए

इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन और वॉट्सएप वीडियो कॉल किए गए। आरोपितों ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एटीएस अधिकारी बताया। पीड़ित से आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य व्यक्तिगत जानकारी भी हासिल की। वाट्सएप वीडियो काल पर पुलिस की वर्दी पहने व्यक्तियों को दिखाया गया। हथियारों से संबंधित फोटो और अन्य दस्तावेज भेजकर उनमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान करने को कहा गया।

फर्जी दस्तावेज भेजकर पीड़ित के विरुद्ध प्रकरण दर्ज होने की बात कही

ठगों ने सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के लेटरहेड जैसे दिखने वाले फर्जी दस्तावेज भेजकर पीड़ित के विरुद्ध प्रकरण दर्ज होने की बात कही। इसके बाद राशि के सत्यापन के नाम पर बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि सत्यापन के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

एक बैंक ने 35 लाख का हिसाब मांगा तो दूसरे में पहुंचा पीड़ित

ठगों के दबाव में पीड़ित ने 17 सितंबर को 35 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। इसके बाद जब वह दोबारा बैंक पहुंचा तो बैंक कर्मचारियों को संदेह हुआ। बैंक ने रुपये के संबंध में जानकारी मांगी तो पीड़ित वहां से दूसरे बैंक चला गया और 18 सितंबर को 20 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। शनिवार को पीड़ित घर पर अकेले थे। परिवार ने संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर पत्नी ने रिश्तेदारों से संपर्क किया।

संपर्क होने पर स्वजनों को पता चला कि पीड़ित हड़बड़ाहट में हैं और बड़ी राशि ट्रांसफर करने की बात कर रहे हैं। उस समय वह ठगों के कहने पर 20 लाख रुपये और ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहे थे। साइबर सेल के प्रधान आरक्षक लक्ष्मीनारायण सूर्यवंशी और स्वजनों ने समझाइश देकर उन्हें अतिरिक्त राशि ट्रांसफर करने से रोका। पीड़ित की काउंसलिंग कर उन्हें बताया गया कि वह साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट के झांसे में आ गए थे।

कॉलिंग वाले नंबर असम के, 250 खातों में पहुंचा पैसा

एसपी अमित कुमार ने एएसपी विवेक कुमार एवं एएसपी राकेश पंद्रो के मार्गदर्शन में साइबर सेल को कार्रवाई के निर्देश दिए। टीम ने एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से संबंधित बैंकिंग चैनल में तुरंत संपर्क कर 15 लाख रुपये फ्रीज करवाए। मामले में ई-एफआइआर दर्ज की गई है।

पुलिस के अनुसार आरोपितों द्वारा कॉलिंग में उपयोग किए गए नंबर असम के हैं। पीड़ित द्वारा दो खातों में रुपये ट्रांसफर करने के बाद राशि देश के अलग-अलग हिस्सों में बनाए गए करीब 250 म्यूल अकाउंट में पहुंच गई। पुलिस ने वॉट्सएप से कालिंग की लोकेशन की जानकारी मांगी है। आरोपितों ने शुरुआत में ही अपनी पहचान बताई, इसके बाद हमेशा वीडियो बंद रखा।

पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

पुलिस ने अपील की है कि कोई भी पुलिस अधिकारी, सीबीआइ, ईडी, एनसीबी, ट्राई, एटीएस अथवा सुप्रीम कोर्ट के नाम पर मोबाइल या वीडियो काल कर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं कर सकता। यदि कोई स्वयं को अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, एफआइआर, मनी लान्ड्रिंग, ड्रग्स, सिम कार्ड अथवा किसी अन्य आपराधिक मामले का भय दिखाकर रुपये ट्रांसफर करने को कहता है तो यह साइबर ठगी का संकेत है। ऐसी स्थिति में तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

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