
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम: सेवानिवृत प्राध्यापक से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 01 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों का रिमांड समाप्त होने के बाद शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया। बिहार के जिला सिवान ग्राम अंबारी निवासी 44 वर्षीय मुख्य आरोपी राजेश पुत्र राम प्रसाद सिंह का रिमांड तीन दिन तक बढ़ाया गया है।
न्यायालय ने नीमच के पवन पुत्र कैलाश कुमावत, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के ग्राम भेड़ियागढ़ निवासी अमरेन्द्र कुमार पुत्र बडेलाल प्रसाद मौर्य, गुजरात के जामनगर के आरिफ घाटा, हमीद खान पठान, शाहिद कुरेशी, सादिक हसन समा को जेल भेज दिया। जिले में डिजिटल अरेस्ट का यह पहला मामला है। राजेश के आठ से दस अन्य साथियों की तलाश में पुलिस की तीन टीमें अलग-अलग राज्यों में जाएगी। डीआइजी निमिष अग्रवाल पूरे मामले को लीड कर रहे हैं।
बिहार का राजेश ठगी का मास्टर माइंड है। पूछताछ में पता चला कि राजेश के साथियों ने अमस में एक होटल में फर्जी कोर्ट रुम बनाकर पूरा सेटअप तैयार किया था। जो रुपये ट्रांसफर किए गए, उनमें से अभी तक करीब 14 लाख ही फ्रीज हो पाए हैं। खातों में ट्रांसफर कर अन्य रुपये ठगों ने क्रिप्टो करंसी में एक्सचेंज करके निकाल लिए।
शुरूआत में जो 11 आरोपी पकड़े गए, उन्होंने कमीशन की लालच में अपने खाते आरोपी राजेश को दिए थे। असम, बिहार और जम्मू कश्मीर का लिंक निकलकर सामने आया है। ठगो ने वीपीएन प्रक्रिया के जरिए अपना आइपी एड्रेस बदलकर डिजिटल अरेस्ट को अंजाम दिया। पुलिस इनकी लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास कर रही है।
मालूम हो कि 30 दिसंबर को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 01 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और गुजरात से अब तक एक नाबालिग सहित 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। आरोपित राजेश ने अन्य के बैंक खाते कमीशन से किराये पर लिए थे।
15 नवंबर 2025 को फरियादी के मोबाइल पर अज्ञात नंबर से कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनकी सिम का उपयोग मुंबई स्थित केनरा बैंक में 247 करोड़ रुपये की मनी लान्ड्रिंग में हुआ है। गिरफ्तारी वारंट जारी होने और तत्काल गिरफ्तारी का डर दिखाकर व्हाट्सएप काल के माध्यम से मानसिक दबाव बनाकर आधार कार्ड सहित अन्य निजी दस्तावेज लेने के बाद उनके मोबाइल में सिग्नल एप इंस्टाल करवाया गया था। 28 दिनों तक ठगों ने दंपत्ति को डिजिटल अरेस्ट करके रखा था।
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जिले में वर्ष 2025 में 21 थानों में साइबर ठगी से जुड़े 885 मामले सामने आए है। इनमें डिजिटल अरेस्ट से जुड़ा एक ही मामला आया है। कुछ समय पहले भी डिजिटल अरेस्ट के प्रयास का एक मामला पुलिस के सामने आया था। जिसमें फरियादी की सूझबूझ से वह ठगी से बच गया था।
इससे पहले ही जबलपुर के अशोक पुत्र राधेश्याम जायसवाल, सनी पुत्र सोनू जायसवाल, सारांश उर्फ शानु पुत्र योगेन्द्र तिवारी को जेल और एक नाबालिग आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह भेज चुकी है। गिरफ्तार 11 आरोपियों में से कोई भी डिजिटल अरेस्ट करने वालो में शामिल नहीं है।