
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम: मादक पदार्थ तस्करी में शामिल तीन तस्करों की करीब 65.70 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर एसपी अमित कुमार के निर्देशन में मुंबई सफेमा न्यायालय में फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा रही है। इसमें जावरा के थाना औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत अरनिया गुर्जर निवासी गुमान सिंह पुत्र रतनलाल गुर्जर, उमठ पालिया निवासी मुनव्वर पुत्र गुलाब खां मेवाती व शरीफ पुत्र याकूब ख़ां मेवाती शामिल है। तीनों तस्कर न्यायालय से दंडित किए जा चुके है।
पुलिस के अनुसार जांच में सामने आया कि गुमान सिंह, मुनव्वर और शरीफ लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त रहे हैं। इस अवैध गतिविधि से तीनों ने भारी मात्रा में अचल संपत्तियां अर्जित की, जिनके संबंध में कोई वैध आय स्रोत प्रमाणित नहीं हो सका।
जांच अधिकारी द्वारा समस्त तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत सफेमा न्यायालय से संपत्ति फ्रीज किए जाने के लिए अपील की गई है। बता दें कि गुमान सिंह गुर्जर को 31 मार्च 2014 को अवैध मादक पदार्थ एवं अवैध शराब की तस्करी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।
न्यायालय द्वारा गुमान सिंह को 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया। उमटपालिया के मुनव्वर खां मेवाती को डोडाचूरा पीसकर पाउडर बनाकर संगठित रूप से तस्करी में संलिप्त पाया गया। न्यायालय द्वारा 15 वर्ष का सश्रम कारावास एवं डेढ़ लाख रुपये का अर्थदंड दिया गया। शरीफ खां मेवाती को अवैध अफीम एवं डोडाचूरा की तस्करी में संलिप्त पाया गया। न्यायालय द्वारा 14 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दो लाख रुपये का अर्थदंड सुनाया गया।
29 अगस्त 2025 को अफीम तस्करी के मामले में थाना बरखेड़ाकला के ग्राम कराडिया निवासी मोहनलाल पुत्र नंदराम पाटीदार व पुत्र रंगलाल पाटीदार की संपत्ति को सफेमा न्यायालय ने अटैच करने के आदेश दिए थे। यह जिले में सफेमा की पहली कार्रवाई थी। दोनों आरोपितों को 10 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। सफेमा न्यायालय द्वारा पिता पुत्र की नौ लाख रुपये की भूमि अटैच की गई।
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एसपी अमित कुमार ने बताया कि सफेमा (स्मगलर्स एंड फारेन एक्सचेंज मेनिप्यूलेटर्स एक्ट) न्यायालय एक विशेष अपीलीय न्यायालय है, जो मादक पदार्थों और तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई करता है। एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब यह प्रमाणित होता है कि किसी व्यक्ति ने नशे के अवैध कारोबार से संपत्ति अर्जित की है, तब संबंधित एजेंसी द्वारा सफेमा न्यायालय में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है।
न्यायालय जांच के बाद ऐसी संपत्तियों को फ्रीज या अटैच करने का आदेश देता है, जिससे उनका उपयोग दोबारा अपराध में न हो सके। यह कार्रवाई अवैध कमाई को रोकने और अपराधियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए की जाती है। जिले के और भी तस्करों को चिन्हित किया गया है, जिनके खिलाफ सफेमा की कार्रवाई की जाना है।