
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम/नामली। नामली में सोमवार दोपहर मंडी गेट के आगे महू-नीमच फोरलेन पर तेज रफ्तार अज्ञात ट्राले की टक्कर से बाइक सवार मां और उसके एक माह के बेटे की मौत हो गई, जबकि पिता और दो वर्षीय बेटी घायल हो गए। परिवार बच्चे को टीका लगवाने और उसका जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नामली जा रहा था। हादसे में 26 वर्षीय सुगनबाई और उसके दूधमुंहे बेटे हर्षित की मौत हो गई। घायल अनिल गुंदरावत और उसकी बेटी अर्चना को रतलाम मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। हादसे के बाद ट्राला चालक रतलाम की ओर भाग निकला।
सोमवार सुबह करीब 11:45 बजे बाइक सवार परिवार स्पीड ब्रेकर के कारण धीमी गति से चल रहा था। इसी दौरान पीछे से आए ट्राले ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर से सुगनबाई सड़क की ओर गिर गई, जबकि अनिल और उसकी बेटी अर्चना सड़क किनारे जा गिरे। सुगनबाई ट्राले के पहिए की चपेट में आ गई, जबकि एक माह के हर्षित के सिर में गंभीर चोट आई। सुगनबाई की मौके पर ही मौत हो गई। हर्षित को उपचार के लिए मेडिकल कालेज ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
अनिल गुंदरावत मंदसौर जिले के अफजलपुर थाना क्षेत्र के ग्राम लामगिरी का निवासी है। रविवार रात वह ट्रेन से नामली थाना क्षेत्र के ग्राम बड़ौदा स्थित अपने ससुराल आया था। सोमवार सुबह उसे पत्नी सुगनबाई को लेकर नामली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टीका लगवाने और जन्मप्रमाणपत्र बनवाने जाना था। अनिल, ससुर बद्रीलाल की बाइक से पत्नी और दोनों बच्चों को लेकर नामली के लिए निकला। हर्षित का जन्म 29 सितंबर को हुआ था। बाइक पर आगे अर्चना, पीछे पत्नी सुगनबाई गोद में हर्षित को लेकर बैठी थी। अनिल के हाथ-पैर में मामूली चोट आई है, जबकि अर्चना को हल्की खरोंच आई। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
हादसे के बाद मां-बेटे के पोस्टमार्टम शाम तक भी नहीं हो सका। मंगलवा सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव सवजनों को सौंपा जाएगा। थाना प्रभारी आनंद सिंह आजाद ने बताया कि सीसीटीएनएस में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जाती है। दोपहर तक मर्ग रिपोर्ट करने स्वजन उपस्थित नहीं हो सके थे। प्रक्रिया के कारण देरी हुई है। अज्ञात चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर आरोपित की तलाश की जा रही है।
यह भी पढ़ें- ग्वालियर में बड़ा हादसा: 40 करोड़ के CM राइज स्कूल की छत भरभराकर गिरी, दो पिलर टूटे; चार मजदूर घायल
हादसे के बाद जब पुलिस ने फोरलेन पर लगे सीसीटीवी कैमरे जांचे तो वे बंद मिले। इससे क्षेत्रीय लोगों ने नाराजगी जताई। नागरिकों का कहना है कि कैमरे चालू होते तो हादसे के बाद भागे वाहन की पहचान करने में मदद मिल सकती थी।