
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। बारिश की कमी ने जिले के वर्तमान और भविष्य का परिदृश्य बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कृषि प्रधान जिले में वर्तमान में किसानों (Ratlam Farmers) को जहां खरीफ का उत्पादन आशानुरूप नहीं मिल रहा है, वहीं भविष्य में रबी फसलों की सिंचाई और पेयजल को लेकर बड़ा संकट खड़ा होने की संभावना बढ़ती जा रही है।
अब तक जिले में औसत 591.25 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जो गत वर्ष इसी अवधि में हुई 1250.38 मिमी बारिश की तुलना में 659.13 मिमी कम है। जिले की कुल औसत वार्षिक बारिश 918.13 मिमी है। तीन दिन से इंद्रदेव की जिले में कहीं भी मेहरबानी नहीं हुई है। जिले के अधिकांश जलाशयों की स्थिति चिंताजनक है।
जलाशयों में अब तक क्षमता के मुकाबले कहीं 20 तो कहीं 35 फीसद तक पानी ही संग्रहित हो पाया है। यदि आगामी दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो रबी फसलों की सिंचाई के साथ पेयजल को लेकर बड़ा संकट गहरा सकता है।
सोमवार सुबह आठ बजे समाप्त हुए बीते चौबीस घंटों के दौरान जिले में कहीं भी बारिश नहीं हुई। गत वर्ष आलोट तहसील में 809 मिमी, जावरा में 1330 मिमी, ताल में 579 मिमी, पिपलौदा में 1429 मिमी, बाजना में 981 मिमी, रतलाम में 1338 मिमी, रावटी में 1642 मिमी, सैलाना तहसील में 1895 मिमी बारिश हुई थी।
सोमवार को दिनभर हवाओं के साथ बादलों की उमड़-घुमड़ होती रही, लेकिन कहीं भी बारिश नहीं हुई। रविवार के मुकाबले सोमवार को अधिकतम तापमान में 0.6 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान में 0.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुबह की आर्द्रता 87 प्रतिशत व शाम की 76 प्रतिशत रही, जो रविवार को क्रमश: 90 व 77 प्रतिशत थी।
सैलाना में सोयाबीन कटाई ने पकड़ी रफ्तार
सैलाना : अंचल में सोयाबीन कटाई तेज है। मानसून की बेरुखी के बावजूद फसल अच्छी होने से किसान खुश हैं, लेकिन रबी के लिए पानी की चिंता है। अडवानिया सहित आसपास गांवों में किसान हाथों-हाथ कटाई कर थ्रेसर से दाना निकाल रहे हैं। कृषि विभाग ने उपज को नमी से बचाकर रखने की अपील की।
आलोट : क्षेत्र में सोयाबीन कटाई और मशीनों से निकालने का काम तेज है। खंड बारिश से अलग-अलग गांवों में पैदावार दो से चार क्विंटल प्रति बीघा तथा कहीं इससे कम-अधिक बताई जा रही है। किसानों के अनुसार लागत बढ़ने, पैदावार व भाव घटने से नुकसान की आशंका है। कम बारिश से रबी सिंचाई के पानी की चिंता भी है।
जोयन के रतनसिंह आंजना ने 2.5 से 3.5, पाटन के कालूराम पाटीदार ने 2.5 से चार और दूधिया के शंभूलाल गेहलोत ने तीन से चार क्विंटल उत्पादन बताया। गुलबालोद में तीन से 3.5, पिपलिया सिसोदिया में चार से 4.5 और सुंदरपुरा में करीब 4.5 क्विंटल की जानकारी मिली। पर्वतसिंह यादव ने पांच बीघा में केवल पांच क्विंटल बताया।