
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। मेगा इंडस्ट्रियल पार्क (निवेश क्षेत्र) की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को सोमवार को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। जिन लोगों के मकान तोड़े जाने हैं, उन्होंने रतलाम-शिवगढ़ रोड पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों के सड़क पर धरने पर बैठ जाने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।
सुबह करीब 10:30 बजे प्रशासनिक अमला बुलडोजर व मजदूरों के साथ मौके पर पहुंचा। जैसे ही कार्रवाई की तैयारी शुरू हुई, आक्रोशित लोगों ने नारेबाजी करते हुए चक्काजाम कर दिया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मौके से करीब एक किलोमीटर पहले बैरिकेडिंग कर वाहनों का प्रवेश रोक दिया।

मौके पर भारी पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। एसडीएम आर्ची हरित, सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया, तहसीलदार ऋषभ ठाकुर सहित अन्य अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर समझाइश दी। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद 2 बजे चक्काजाम खुलवाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने आगे की कार्रवाई जारी रखी।
मालूम हो कि प्रशासन मेगा इंडस्ट्रियल पार्क की करीब 13 हेक्टेयर जमीन खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले रविवार को भी प्रशासनिक अमला बिबड़ौद पहुंचा था। यहां करीब 30 मकान और 30 ईंट भट्ठों को हटाया जाना प्रस्तावित है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को करीब 8 किलोमीटर दूर लखनगढ़ में शिफ्ट करने की योजना बनाई है, जिसका स्थानीय लोग अव्यवस्थाओं का हवाला देकर लगातार विरोध कर रहे हैं।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे पिछले 30 से 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं। इससे पहले वे रतलाम शहर में अमृत सागर तालाब के किनारे निवास करते थे, जहां से प्रशासन ने उन्हें हटाकर बिबड़ौद में बसाया था। अब यहां से भी उन्हें उजाड़ा जा रहा है, जिससे वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल मौके पर स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।

शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि गांव बिबड़ोद की शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण के संबंध में दायर 37 अपीलों को न्यायालय ने खारिज कर दिया है। स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप रतलाम हेतु आवंटित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 506/1 पर अतिक्रमण के मामले में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने यह आदेश पारित किया।
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शासन की ओर से न्यायालय को बताया गया कि स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप रतलाम के लिए यह भूमि उद्योग स्थापना कार्य हेतु आवंटित की गई है। ईंट भट्टों के संचालन के लिए संबंधित लोगों को दूसरे स्थान पर भूमि भी आवंटित की गई है तथा सभी अतिक्रमणकर्ताओं को विधिवत सूचना पत्र जारी कर हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा कि शासन द्वारा विधि अनुसार एवं विधिवत सूचना देकर कार्रवाई की जा रही है और यह कार्य लोकहित को दृष्टिगत रखते हुए किया जा रहा है। इसी आधार पर 37 वादियों की ओर से दायर अपीलों को निरस्त कर दिया गया।