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National Cyber Helpline 1930 भी नहीं है सुरक्षित, कॉल ड्रॉप होते ही आया ठग का फोन, झांसे में आते-आते बचा शिकायतकर्ता

रतलाम में नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर फोन करने के बाद एक शिकायतकर्ता ठगी का शिकार होते-होते बचा। हेल्पलाइन नंबर पर कॉल ड्रॉप होते ही ठग का फोन ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Wed, 17 Dec 2025 02:53:41 AM (IST)Updated Date: Wed, 17 Dec 2025 02:55:31 AM (IST)
National Cyber Helpline 1930 भी नहीं है सुरक्षित, कॉल ड्रॉप होते ही आया ठग का फोन, झांसे में आते-आते बचा शिकायतकर्ता
खुद को नेशनल साइबर हेल्पलाइन का कर्मचारी बताकर भेजी यह फोटो

HighLights

  1. राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 के जरिए ठगी की कोशिश
  2. शिकायत दर्ज कराने के लिए कॉल करने पर ठग का आया फोन
  3. ठग ने खुद को नेशनल साइबर हेल्पलाइन का कर्मचारी बताया

नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम: वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराने के लिए बनाई गई राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 की कार्यप्रणाली को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने जैसे ही 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया तो कॉल अचानक ड्रॉप हो गई। हैरानी की बात यह रही कि कुछ ही मिनटों बाद एक अनजान मोबाइल नंबर से कॉल आया, जिसमें फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को नेशनल साइबर हेल्पलाइन का कर्मचारी बताया। हालांकि समय रहते सतर्क होने पर शिकायतकर्ता अपने साथ होने वाली ठगी से बच गया।

दरअसल शिकायतकर्ता धोखाधड़ी की शिकायत करने के लिए 12 दिसंबर को एसपी ऑफिस स्थित साइबर सेल पहुंचा था, वहां पर कोई नहीं मिला तो उसने बाहर बोर्ड पर लिखे 1930 पर चार से पांच बार कॉल करने का प्रयास किया, लेकिन कॉल कनेक्ट नहीं हुआ। शाम 05:20 पर कॉल ड्राप होने के बाद 05:22 पर उसे एक अनजान नंबर से फोन आया।


ठग ने मांगा शुल्क

कॉल पर दूसरी ओर से कहा गया कि आप 1930 पर फोन करने का प्रयास कर रहे थे। फिर ठग शिकायत सुनकर वाट्सएप पर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के लेटर हेड पर अंग्रजी में शिकायत विवरण का पीडीएफ भेजता है। जिसमें एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन आफ इंडिया) द्वारा रिफंड के लिए शुल्क काटे जाने की जानकारी लिखी होती है।

शिकायतकर्ता को दोबारा उसी नंबर से कॉल आता है और ठग झांसे में लेकर कहता है कि आपके रुपये होल्ड कर दिए गए हैं। रुपये वापस लेने के लिए पहले 1250 रुपये का शुल्क देना होगा। इसमें से 250 रुपये काट कर 1000 रुपये वापस कर दिए जाएंगे। शिकायतकर्ता शंका होने पर स्थानीय साइबर सेल के पास पहुंचा, जहां जांच में मामला फर्जी निकला। इस तरह कि शिकायत मिलने से साइबर सेल के अधिकारी भी सकते में आ गए।

बिहार में चल रहा मोबाइल, शिकायत नंबर उत्तर प्रदेश का

शातिर ठग ने पीडीएफ में जो नंबर लिखा था वो उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर जिले में किसी और के नाम पर दर्ज निकला। जिस मोबाइल नंबर से ठग ने कॉल किया वह बिहार में एक्टिव है। ठग इतना शातिर है कि उसने वाट्सएप पर पुलिस वर्दी में प्रोफाइल फोटो लगाया हुआ है। जिसमें पीछे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र गृह मंत्रालय का बैनर लगा हुआ है। जांच के दौरान पूरा घटनाक्रम फर्जी और संदिग्ध निकला।

मेन इन द मिडिल अटैक की आशंका

साइबर जानकार दीपक मेहता ने बताया कि मेन इन द मिडिल अटैक साइबर ठगी और हैकिंग की एक तकनीक है, इसमे अपराधी आपके मोबाइल, इंटरनेट या कॉल कनेक्शन को बीच में पकड़ लेता है। 1930 पर कॉल के दौरान यदि कॉल ड्रॉप होती है, तो कॉलर का मोबाइल नंबर टेलीकाम सिस्टम या किसी इंटरमीडिएट प्लेटफार्म पर लाग हो सकता है।

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साइबर ठग ऐसे लीक या एक्सपोज्ड डेटा पर नजर रख तुरंत उसी नंबर पर कॉल कर सकते हैं। कुछ मामलों में ठग थर्ड-पार्टी ऐप, कॉल रिकार्डिंग ऐप या पहले से संक्रमित मोबाइल के जरिए भी कॉल करने वाले की जानकारी हासिल कर लेते हैं।

साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद कॉल कर शुल्क मांगने की कोई प्रक्रिया नहीं है। 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर की गई शिकायत की कार्रवाई पूरी तरह नि:शुल्क होती है। पहली बार इस तरह का मामला सामने आया है। जांच करवाई जा रही है। सतर्कता के लिए एडवाइजरी जारी कर रहे हैं।

- अमित कुमार, एसपी, रतलाम