
जयदीप गुर्जर, नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। दिल्ली से मुंबई जा रही ट्रेन में रतलाम जंक्शन पर राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआइ) द्वारा एक नाइजीरियाई महिला के कब्जे से दो किलोग्राम एम्फेटामाइन ड्रग जब्त किए जाने की कार्रवाई ने दिल्ली-मुंबई कारिडोर पर सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की ओर फिर से ध्यान खींचा है।
प्रारंभिक जांच में न महिला का रतलाम से संबंध सामने आया है और न ही बरामद मादक पदार्थ का स्रोत रतलाम बताया गया है। उसे केवल खूफिया सूचना के आधार पर रतलाम जंक्शन पर इंटरसेप्ट किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रतलाम ड्रग का नया हब बन रहा है या फिर देश के सबसे व्यस्त कारिडोर पर सुरक्षा एजेंसियों का सबसे महत्वपूर्ण इंटरसेप्शन पाइंट बन चुका है।
रतलाम की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। पश्चिम रेलवे का प्रमुख जंक्शन होने के कारण यहां से दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग गुजरता है। इसके साथ ही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और राजस्थान, गुजरात तथा मध्यप्रदेश की अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी इसे उत्तर और पश्चिम भारत के बीच एक अहम ट्रांजिट कारिडोर बनाती है। यही वजह है कि डीआरआइ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और मध्यप्रदेश पुलिस की नजर इस क्षेत्र पर लगातार बनी हुई है।
रतलाम से दिल्ली और मुंबई मार्ग पर औसतन हर एक से दो घंटे में प्रीमियम या सुपरफास्ट ट्रेनें उपलब्ध रहती हैं। इंदौर, उज्जैन, दाहोद, और नागदा के लिए नियमित पैसेंजर ट्रेनें दिनभर में कई बार चलती हैं। यहां से दिल्ली, मुंबई, जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों के लिए कनेक्टिविटी आसान है। हालांकि पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम से स्पष्ट है कि तस्कर अब रतलाम का उपयोग केवल माल गुजारने के लिए नहीं, बल्कि अवैध निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के लिए भी कर रहे हैं।
वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में रतलाम जिले में एमडी (मेफेड्रोन) के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई। पुलिस ने आठ थाना क्षेत्रों में 23 प्रकरण दर्ज कर 81 आरोपितों को गिरफ्तार किया तथा 14.175 किलोग्राम एमडी जब्त की, जो पिछले दो वर्षों की संयुक्त बरामदगी से भी अधिक है। वहीं पहले पांच महीनों में एनडीपीएस के 41 प्रकरण दर्ज कर 125 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।
जनवरी 2026 में कालूखेड़ा थाना क्षेत्र के चिकलाना गांव में एमडी फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ। मुख्य आरोपित याकूब, राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के देवलदी गांव का निवासी निकला। जांच में सामने आया कि यहां बनी एमडी मुंबई सहित बड़े महानगरों की हाई-प्रोफाइल पार्टियों तक पहुंचाई जाती थी।
मार्च में पिपलौदा के बोरखेड़ा गांव में दूसरी एमडी फैक्ट्री पकड़ी गई, जिसका मास्टरमाइंड जमशेद खान उर्फ लाला उर्फ डॉक्टर भी देवलदी का निवासी बताया गया। इससे पहले अक्टूबर 2025 में एनसीबी की इंदौर यूनिट ने सेजावता गांव में अवैध अल्प्राजोलम निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया था। तेलंगाना से मिली सूचना पर शुरू हुई जांच में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित अन्य राज्यों तक फैले नेटवर्क के संकेत मिले।
यह भी पढ़ें- आलीराजपुर हॉस्टल में छात्र की संदिग्ध मौत, फंदे से लटका मिला 11वीं का छात्र, सुसाइड नोट में लिखा- I Hate You Sir
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, व्यस्त रेल नेटवर्क और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी के कारण ड्रग तस्करी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में डीआरआइ, एनसीबी, पुलिस, आरपीएफ और अन्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने, आधुनिक स्कैनर, एआइ आधारित निगरानी और संयुक्त अभियान की जरूरत है। फिलहाल अधिकांश कार्रवाई मुखबिर तंत्र और टिप-ऑफ पर निर्भर है, जबकि जंक्शन पर हाईटेक बैगेज स्कैनिंग और स्थायी डाग स्क्वाड जैसी सुविधाएं सीमित हैं।
रेंज में ड्रग निर्माण से लेकर खरीदी करने वाले तक पुलिस की रडार पर है। तस्करों के सोर्स को चिह्नित किया जा रहा है। बार्डर एरिया पर हमारी कड़ी नजर है। मंदसौर, नीमच और रतलाम में विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।- निमिष अग्रवाल, डीआइजी रतलाम रेंज।