
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम: ग्राम चिकलाना में आरोपित दिलावर खान उर्फ मामा के मकान से एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ाने के साथ ही जब्त किए गए राष्ट्रीय पक्षी मोर के जोड़े को न्यायालय के आदेश पर वन विभाग ने जंगल में छोड़ दिया है। पुलिस ने दबिश में दिलावर के घर से एक नर और एक मादा मोर, 40 किलो चंदन और छह तीतर पक्षी बरामद किए थे। मामले में वन विभाग ने अपनी कार्रवाई पूरी कर केस कालूखेड़ा थाने को सौंप दिया है। बड़ी मात्रा में चंदन मिलने के बाद तस्करी के बिंदू पर भी पुलिस जांच करेगी।

आरोपी दिलावर ने मोर को पिंजरे में कैद करके रखा था। पुलिस ने जब मोर रखने का कारण पूछा तो उसने इसे अपना शौक बताया था। शनिवार को एक दिन के रिमांड पर जेल से लाई गई दिलावर की पत्नी फरिदा को वापस जेल भेज दिया गया है।
शुक्रवार को दिलावर और फरीदा को पुलिस चिकलाना लेकर पहुंची थी और घर का लाकर खुलवाया, जिसमें फरीदा के सोने के गहने और करीब 17 हजार रुपये मिले। इधर न्यायालय के आदेश पर पकड़े गए एमडी ड्रग और केमिकल के परिक्षण के लिए सेंपल फॉरेंसिक को भेजने की तैयारी पुलिस कर रही है।
आरोपियों का महाराष्ट्र के मुंबई और गुजरात के अहमदाबाद से कनेक्शन सामने आया है। एमडी ड्रग बनाकर सप्लाई इन्हीं क्षेत्रों में की जा रही थी। दोनों ही स्थानों पर आरोपितों की रिश्तेदारी होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस याकूब को लेकर शनिवार को मुंबई पहुंची। उसके बताए ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। याकूब को लेकर मुंबई के पांच से छह थानों पर पुलिस ने संपर्क किया।
अगली कड़ी में याकूब को गुजरात के अहमदाबाद भी ले जाया जा सकता है। हालांकि मुंबई में पुलिस के हाथ कुछ खास नहीं लगा है। एसपी अमित कुमार ने बताया कि जांच में चार अन्य टीमें भी लगी है। कुल 26 आरोपी प्रकरण में शामिल है। 17 गिरफ्तार हो चुके हैं जबकि 9 आरोपियों की तलाश की जा रही है। सफेमा की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
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एडवोकेट मंथन मुसले ने बताया कि राष्ट्रीय पक्षी मोर तथा चंदन दोनों ही क़ानूनी संरक्षण में आते हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मोर को अनुसूची–1 में शामिल किया गया है, जो सर्वोच्च स्तर का संरक्षण प्रदान करती है। मोर को पकड़ना, पालना, ख़रीद-बिक्री करना, घायल करना अथवा मारना दंडनीय अपराध है। दोष सिद्ध होने पर तीन से सात वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है।
वहीं चंदन को भारतीय वन अधिनियम 1927 तथा संबंधित राज्य वन क़ानूनों के अंतर्गत संरक्षित वृक्ष की श्रेणी में रखा गया है। बिना वैध अनुमति चंदन को काटना, अपने पास रखना, परिवहन करना या व्यापार करना अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें एक से पांच साल की सजा और जुर्माने का प्रविधान है।