
बाजना। श्रीमद् भागवत गीता परमात्मा के मुख से निकली वाणी है, इसलिए धर्म ग्रंथ है। श्रीमद् भागवत गीता को सारे ग्रंथों का निचोड़ और कर्मों की मुक्ति का ग्रंथ माना गया है। श्रीमद् गीता में परमेश्वर कहते हैं फल की इच्छा से कार्य मत करो। सेवा भाव से कार्य करें। फल देने वाले परमात्मा है। श्रीमद् भागवत गीता के पठन, श्रवण करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त होता है। जिस प्रकार तालाब में रहते हुए कमल के फूल के पत्तों पर पानी नहीं ठहरता है, ठीक उसी प्रकार गीता पाठ करने वाले को किसी प्रकार का पाप नहीं लगता है।
यह बात गांव के राधा-कृष्ण मंदिर पर भागवत सप्ताह कथा के विराम अवसर पर पंडित दुर्गा शंकर ओझा ने कही। उन्होंने कहा कि करोड़ों की संपत्ति, मकान, है। घर में सभी तरह का फर्नीचर है, लेकिन प्रभु वाणी की गीता नहीं है, तो वह घर पतन, विनाश का कारण बनता है। मुस्लिम भाई के घर में कुरान, ईसाई बाइबल रखता है। आप कैसे सनातनी हो यदि आपके पास प्रभु की वाणी श्रीमद् गीता नहीं है तो। श्राद्ध पक्ष में जिसके घर में रोज गीता का पाठ होता है, उसके भटके हुए पितृ भी मोक्ष को प्राप्त करते हैं। भागवताचार्य पंडित दुर्गा शंकर व पंडित साईं शर्मा के मंत्रोच्चार के साथ यजमानों ने हवन कुंड में आहुतियां देकर विश्व में सुख, शांति, समृद्धि के लिए मंगल कामना की।
मंदिर समिति ने किया बहुमान
भागवत कथा के सप्तम दिवस मंदिर समिति द्वारा भगवताचार्य दुर्गाशंकर ओझा, लोकेंद्र पुरोहित एंड पार्टी के साथ मंदिर पुजारी, सहयोगीजनों का बहुमान किया गया। ढोल-ढमाकों के साथ भागवत जी को लेकर मांगीलाल नंदलाल के निवास पर पहुंचे। स्वजन के साथ ग्रामवासियों ने अगवानी कर आरती उतारी। बाद में प्रसाद का वितरण किया गया।
अपराजेय नगरी है अयोध्या
करिया। जिस देश की नदियों में सरयू जैसी पवित्र नदी व नगरों में अयोध्या जैसी पावन नगरी स्थित हो, उस धरा पर जन्म लेने वाले को बड़ा भाग्यशाली समझना चाहिए। यह बात पंडित बंशीदास वैष्णव (उंडेरी, सरदारपुर) धार ने कही। वे श्रीराम-जानकी मंदिर में आयोजित भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अयोध्या नगरी के इतिहास का रोचक वर्णन करते हुए इसे अपराजेय नगरी बताया। इस पर अनादि युगों से चक्रवर्ती राजा दशरथ के पूर्वज हो अथवा भगवान रूप में जन्मे पुत्र श्रीराम हो इस नगरी पर सूर्यकुल का ही साम्राज्य रहा है।