
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियों की डिलीवरी कराने और नवजात को अनधिकृत रूप से अपने पास रखने के दो गंभीर मामलों में राजापुरा माताजी अस्पताल से जुड़ी नर्सों की भूमिका सामने आई है। एक नर्स ने दूसरे परिवार के चार वर्षीय बच्चे को अपना बेटा बताकर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश कर दिया था, जबकि अस्पताल से सेवानिवृत्त दूसरी नर्स के पास छह साल से एक बच्ची रह रही है। खुलासे के बाद मानव तस्करी की आशंका भी सामने आ रही है।
इधर, बुधवार को पुलिस ने नर्स अनीता खरत के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम में प्रकरण दर्ज किया है। बच्चे को रेस्क्यू कर मातृछाया भेज दिया गया है। आरोपिता अनीता को पुलिस ने सूचना पत्र पर थाने से ही छोड़ दिया।
शिवगढ़ क्षेत्र के राजापुरा माताजी अस्पताल में पदस्थ नर्स अनीता खरते के पास एक बच्चा अनधिकृत रूप से रह रहा था। पुलिस ने 22 जून को बच्चे को रेस्क्यू कर सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया था। इस दौरान अनीता ने जन्म प्रमाण पत्र और समग्र आइडी प्रस्तुत कर बच्चे को अपना बेटा बताया।
हालांकि 24 जून को बच्चे के नाना ने समिति के सामने बताया कि नर्स बच्चे को खेलने के बहाने अपने घर ले गई थी। इसके बाद बच्चे की वास्तविक पहचान सामने आई और उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया गया था। जांच में अस्पताल के डिलीवरी रजिस्टर में भी गड़बड़ी मिली। इसमें नर्स अनीता का नाम काटछांट कर दर्ज किया गया था। पूर्व में इसकी शिकायत डाक्टर द्वारा भी की गई थी, लेकिन किसी ने संज्ञान नहीं लिया।
सीडब्ल्यूसी का नोटिस मिलने पर नर्स ने एक महिला को समिति के सामने पेश किया। महिला ने बताया कि पति की मौत के बाद ससुराल वालों ने बच्ची को अपनाने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद बच्ची नर्स के पास रहने लगी। जांच में पता चला कि महिला का एक बेटा है और वह पति के हिस्से की खेती का लाभ भी ले रही है। दूसरी ओर छह साल से नर्स के पास रह रही बच्ची का न जन्म प्रमाण पत्र बना और न आधार कार्ड।
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सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष शंभुलाल चौधरी ने 18 जून को शिवगढ़ थाने के तत्कालीन प्रभारी रणजीत मकवाना को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। आठ जुलाई को फिर पत्र लिखा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 17 जुलाई को एसपी अमित कुमार को शिकायत भेजी गई। पांच अगस्त को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया गया। अब नवंबर में कार्रवाई हुई है।