
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के देवलदी, नौगांव और अखेपुर जैसे क्षेत्रों में कभी एमडी ड्रग (मेफेड्रोन) बनाने का बड़ा नेटवर्क सक्रिय था, लेकिन पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियों की सख्ती के बाद अब यह नेटवर्क धीरे-धीरे मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में शिफ्ट हो गया है। पिछले तीन-चार वर्षों में लगातार हुई कार्रवाई के बाद तस्करों ने अपना ठिकाना बदल लिया और अब रतलाम, मंदसौर व आसपास के क्षेत्रों में छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए सिंथेटिक ड्रग का निर्माण किया जा रहा है।
एमडी ड्रग, जिसे महानगरों में ‘म्याऊं-म्याऊं’ के नाम से जाना जाता है, की सबसे ज्यादा खपत मुंबई, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में होने वाली हाई-प्रोफाइल पार्टियों में होती है। जांच एजेंसियों के मुताबिक रतलाम में ढाई महीने के भीतर दूसरी एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि राजस्थान से फरार आरोपित अब मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में शरण लेकर यहीं से ड्रग निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क चला रहे हैं।
तस्कर अब भी अफीम तस्करी के पुराने बेल्ट और स्थापित रूट का ही उपयोग एमडी ड्रग के लिए कर रहे हैं। मंदसौर-नीमच-रतलाम क्षेत्र पहले से ही अफीम तस्करी के लिए कुख्यात रहा है, ऐसे में यहां पहले से मौजूद नेटवर्क और संपर्कों का इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग के कारोबार में किया जा रहा है।
हाल ही में भोपाल, रतलाम और मंदसौर में पकड़ी गई फैक्ट्रियों की कड़ियां प्रतापगढ़ के देवलदी क्षेत्र से जुड़ी मिली हैं। इससे साफ है कि नेटवर्क का संचालन अब भी राजस्थान से हो रहा है, जबकि निर्माण इकाइयां मध्य प्रदेश में शिफ्ट हो चुकी हैं। सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में अब छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए एमडी ड्रग तैयार की जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई कर रही हैं।
6 अक्टूबर 2024 को भोपाल के बगरोदा में एनसीबी व गुजरात एटीएस ने एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी। आरोपित सान्याल बाने और अमित चतुर्वेदी गिरफ्तार हुए। पूछताछ में मंदसौर निवासी हरीश आंजना का नाम सामने आया, जिसे बाद में पकड़ा गया। जांच में खुलासा हुआ कि नेटवर्क का सरगना प्रतापगढ़ के देवलदी निवासी शोएब लाला है, जो राजस्थान से संचालन कर एमपी व गुजरात में सप्लाई कर रहा था।
16 जनवरी 2026 को रतलाम के चिकलाना में पुलिस ने एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी। 10 से अधिक आरोपित गिरफ्तार हुए। दिलावर खान पठान के मकान से 10.50 किलो एमडी ड्रग, 300 लीटर मेफेड्रोन कैमिकल, 2 बंदूकें व 91 कारतूस जब्त किए गए। जांच में सामने आया कि देवलदी निवासी उसका दामाद याकूब खान, जो फरार है, ड्रग बनाने में माहिर था और उसी ने ससुराल को फैक्ट्री में बदला।
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31 मार्च 2026 को रतलाम के बोरखेड़ा में पोल्ट्री फार्म पर चल रही एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी गई। देवलदी निवासी जमशेद लाला उर्फ डाक्टर सहित चार आरोपित गिरफ्तार हुए। मौके से 200 ग्राम एमडी ड्रग, भारी मात्रा में केमिकल व उपकरण जब्त हुए। जांच में सामने आया कि जमशेद को ड्रग बनाने के लिए हायर किया गया था। उसने 7-8 वर्षों में 250 किलो एमडी ड्रग बनाने और कई लोगों को ट्रेनिंग देने की बात कबूली।
एमडी ड्रग फैक्ट्री और तस्करों पर रेंज में कार्रवाई जारी रहेगी। राजस्थान के प्रतापगढ़ और झालावाड़ पुलिस के साथ समन्वय बैठक कर सूचनाओं का आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई के बारे में विमर्श किया जाएगा।- निमिष अग्रवाल, डीआइजी, रतलाम रेंज।