रतलाम में सो रही महिला की आंख खुली तो सामने मगरमच्छ मुंह खोले उनकी ओर बढ़ रहा था, बेटे के साथ खिड़की से निकली
बाजना जनपद के ग्राम कुंदनपुर के समीप नवागांव में बुधवार रात करीब 10 बजे घर में सो रही सीताबाई पत्नी स्व. केसु डोडियार की आंख खुली तो सामने मगरमच्छ था।...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 02:47:59 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 02:47:59 PM (IST)
ग्रामीणों ने मगरमच्छ को बांधकर रखा। -सौजन्यHighLights
- बाजना के नवागांव में रात 10 बजे घर में घुसा 5 फीट 7 इंच लंबा मगरमच्छ
- ग्रामीणों ने रात में पकड़कर बांधा, सुबह वन विभाग ले गया
- मगरमच्छ दरवाजे से करीब तीन फीट दूर था
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। बाजना जनपद के ग्राम कुंदनपुर के समीप नवागांव में बुधवार रात करीब 10 बजे घर में सो रही सीताबाई पत्नी स्व. केसु डोडियार की आंख खुली तो सामने मगरमच्छ था। मगरमच्छ मुंह खोलते हुए उनकी ओर बढ़ रहा था। घबराई सीताबाई अपने सात वर्षीय बेटे के साथ छोटी खिड़की से बाहर निकल गईं। मगरमच्छ दरवाजे से करीब तीन फीट दूर था। सीताबाई ने घबराकर पड़ोसियों को आवाज देकर जगाया। इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को रस्सियों से बांधकर काबू में किया।
सीताबाई मजदूरी करती हैं। उनके पति की करीब सात वर्ष पहले मौत हो चुकी है। उनके दो बेटे हैं। छोटा बेटा सात वर्ष का है, जबकि बड़ा बेटा 12 वर्ष का है। घटना के समय बड़ा बेटा दोस्तों के साथ नदी की ओर गया हुआ था। सीताबाई छोटे बेटे के साथ घर में सो रही थीं। घर का दरवाजा खुला हुआ था। इसी रास्ते से मगरमच्छ के घर में आने की आशंका है।
ग्रामीणों ने रात करीब 10 बजे पुलिस को थाने के नंबर पर सूचना दी, लेकिन पुलिस भी मौके पर नहीं पहुंची सुपुर्द। इसके अलावा रात में वन विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने ही मिलकर मगरमच्छ को पकड़कर पिकअप वाहन में रखा। इसके बाद वे उसे बाजना लेकर जाने लगे, लेकिन वहां कोई जिम्मेदार नहीं मिला।
ग्रामीण वापस लौट आए और मगरमच्छ को नदी में छोड़ने के लिए ले गए। नदी के पास पहुंचने पर मगरमच्छ और ताकतवर नजर आया। इसके बाद ग्रामीण उसे वापस लेकर आए और निर्माणाधीन महादेव मंदिर के पास बांध दिया। दो से तीन युवकों ने रातभर उसकी निगरानी की। मगरमच्छ को रस्सियों से बांधकर रखा गया था। सुबह वन विभाग की टीम पहुंची और उसे अपने साथ वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना ले गई।
माही डेम से करीब 20 किमी दूर है नवागांव
नवागांव से माही डेम करीब 20 किलोमीटर दूर है। माही डेम में मीठे पानी के मगरमच्छ पाए जाते हैं। क्षेत्र की तेलनी नदी भी माही नदी तंत्र से जुड़ी है। ग्रामीणों के अनुसार सूखे के कारण क्षेत्र के जलस्रोतों में पानी कम होता जा रहा है। इसके कारण जीव-जंतुओं की आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही बढ़ रही है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में तेंदुए की मूवमेंट भी लगातार बढ़ने की बात कही है। कुछ समय पहले बाजना क्षेत्र में जंगली सूअर भी शाम के समय गांव की ओर पहुंच गया था। उस मामले में वन विभाग ने क्षेत्र में सर्चिंग की थी, लेकिन कुछ नहीं मिला था।
मगरमच्छ नवागांव तक कैसे पहुंचा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। माही डेम और तेलनी नदी से क्षेत्र का जुड़ाव होने के कारण जलस्रोत के रास्ते इसके आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि वन विभाग की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
दो वर्ष का है मगरमच्छ, कार्यालय में पिंजरे में रखा
सुबह वन विभाग के रेंजर अमित सोनी मगरमच्छ को वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना लेकर पहुंचे। वेटरनरी डॉक्टर फिरोज खान ने उसका परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान मगरमच्छ शांत था। इसकी उम्र करीब दो वर्ष और लंबाई 170 सेंटीमीटर यानी करीब 5 फीट 7 इंच बताई गई है। फिलहाल मगरमच्छ को वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना में पिंजरे में रखा गया है।
मगरमच्छ के रेस्क्यू और आगे की कार्रवाई की जानकारी के लिए रेंजर अमित सोनी को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं किया। डीएफओ से भी संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन काल नहीं लगा। वन विभाग की ओर से फिलहाल मामले में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।