रीवा की बेटी कल्पना और नवजात की मौत के बाद पिता को ले गई पुलिस, आईसीयू में भर्ती
कुछ विशेष मेडिकल जांचों के लिए वे सहयोग नहीं कर रहे थे। प्रशासन के लिए उनका जीवन पहली प्राथमिकता है, इसलिए स्वास्थ्य को देखते हुए यह कदम उठाना पड़ा।
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 08:35:59 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 08:35:59 PM (IST)
कार्रवाई के दौरान धरनास्थल पर मौजूद एसपी एवं कलेक्टर। नईदुनियाHighLights
- रीवा के संजय गांधी अस्पताल में हुई थी जच्चा-बच्चा की मौत
- 15 दिन से कर रहे थे अनशन, दोषियों पर होगी कार्रवाई
- प्रशासन ने कहा-जीवन बचाना पहली प्राथमिकता
नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। संजय गांधी अस्पताल रीवा में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले में 15 दिन से आमरण अनशन कर रहे पिता रामशिरोमणि मिश्रा को पुलिस ने बुधवार को धरना स्थल सिरमौर चौराहे से उठा लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी भी हुई। कल्पना के पिता को कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने बलपूर्वक घेरे को तोड़ा
धरना स्थल पर दोपहर में प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने चारों ओर से घेरा तैयार किया। पुलिस ने बलपूर्वक घेरे को तोड़ा और अनशनकारी पिता को एंबुलेंस में बैठाया और अस्पताल रवाना किया।
दोषियों के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी
एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा कि पीड़ित की जायज मांगों को लेकर कलेक्टर और कमिश्नर स्तर से पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने उनका धरना खत्म करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि उनके जीवन को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
जानें कब क्या हुआ
- 25 अगस्त को कल्पना मिश्रा को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका एक वीडियो बहुप्रसारित हुआ जिसमें वे कहती नजर आ रही हैं कि ऐ बाबू बचा लो, ये लोग हमें मार डालेंगे।
- 26 अगस्त की रात को जच्चा-बच्चा की मौत हो गई।
- 27 की सुबह से प्रदर्शन के बाद दो नर्सिंग स्टाफ और दो डाक्टरों को निलंबित किया गया। जांच के लिए कमेटी गठित हुई।
- 02 सितंबर को अस्पताल अधीक्षक निलंबित हुए। कल्पना के पिता ने भी आमरण अनशन शुरू किया।
- 04 सितंबर को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला अनशन स्थल पहुंचे और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए।
- 07 सितंबर को डीन डा. सुनील अग्रवाल को हटा दिया गया।
- 07 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और 10 को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी भी धरनास्थल पर पहुंचे। तीन बार उपमुख्यमंत्री के आवास का घेराव हुआ।
एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा कि कई दिनों से अन्न-जल त्यागने के कारण उनके शरीर के अंगों पर बुरा असर पड़ रहा था। कुछ विशेष मेडिकल जांचों के लिए वे सहयोग नहीं कर रहे थे। प्रशासन के लिए उनका जीवन पहली प्राथमिकता है, इसलिए स्वास्थ्य को देखते हुए यह कदम उठाना पड़ा।
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