
नईदुनिया प्रतिनिधि, सीधी। सोन नदी से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित खेतों के बीच मगरमच्छ देखे जाने के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। किसान खेतों पर जाने से कतरा रहे हैं, वहीं शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह मगरमच्छ पिछले दो से तीन दिनों से गांव के बाहरी खेतों में डेरा जमाए हुए है। दिन के समय वह खेतों की मेड़ों, गहरी दरारों और झाड़ियों के बीच छिपा रहता है और मौका मिलते ही छोटे जानवरों पर हमला कर देता है।
गांव के किसान शैलेंद्र सिंह ने बताया कि मगरमच्छ अब तक दो बकरी के बच्चों को अपना शिकार बना चुका है। उन्होंने बताया, हम सुबह खेत गए तो मेड़ के पास मगरमच्छ पड़ा था। वह करीब 6 से 7 फीट लंबा है। देखते ही हम भाग खड़े हुए।
कोई किसान अकेले खेत नहीं जा रहा। अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से अक्सर मगरमच्छ भटक कर नदी से दूर नालों और खेतों तक आ जाते हैं, लेकिन इस बार वह आबादी के इतने करीब आ गया है।
मगरमच्छ के गांव में होने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग और संजय टाइगर रिजर्व प्रबंधन को दी है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द मगरमच्छ को रेस्क्यू किया जाए।
इस पूरे मामले में संजय टाइगर रिजर्व के डीएफओ राजेश कन्ना टी ने बताया कि उन्हें शिकारगंज में मगरमच्छ देखे जाने की सूचना प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि यह सोन नदी के इको-सिस्टम का हिस्सा है। संभवतः बाढ़ के पानी के साथ वह नदी से भटक कर खेतों तक पहुंच गया है।
डीएफओ ने बताया कि रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। टीम मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे वापस सोन नदी के गहरे पानी में छोड़ेगी।
डीएफओ ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मगरमच्छ के आसपास भीड़ न लगाएं, उसे छेड़ने या मारने का प्रयास न करें और खेतों की ओर जाते समय समूह में जाएं। वन विभाग ने फिलहाल गांव में निगरानी बढ़ा दी है।
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