
नईदुनिया न्यूज, रीवा। रीवा-सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के फोरलेन निर्माण के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण की मुआवजा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों ने फिर तूल पकड़ लिया है। गुढ़ तहसील क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रभावित किसानों ने मंगलवार को रीवा कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और कमिश्नर शैलेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा और मुआवजा निर्धारण में कथित विसंगतियों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
किसानों का आरोप है कि कुछ प्रकरणों में छोटे-छोटे भूखंडों को एक मानकर मुआवजा तय कर दिया गया, जबकि रिहायशी मकानों और डायवर्सन योग्य भूमि का सही मूल्यांकन नहीं किया गया। किसानों ने मांग की है कि प्रत्येक प्रकरण की दस्तावेजों के आधार पर पुनः जांच हो और भूमि की वास्तविक स्थिति, उपयोग और पात्रता के अनुसार मुआवजा निर्धारित किया जाए। किसानों के अनुसार गुढ़ क्षेत्र में मुआवजे को लेकर पहले भी शिकायतें होती रही हैं, लेकिन निराकरण में देरी से असंतोष बढ़ रहा है।
कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि वे अपनी समस्या लेकर विधायक आवास गए थे, लेकिन ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया गया और शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना गया। हालांकि इस मामले में विधायक पक्ष की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है।
प्रभावित किसानों ने दो टूक कहा कि यदि विसंगतियां दूर नहीं हुईं तो वे मुआवजा वितरण प्रक्रिया से दूरी बनाए रखेंगे और वृहद आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। किसानों का कहना है कि वे कोई अतिरिक्त लाभ नहीं, बल्कि अपनी भूमि के अनुरूप न्यायसंगत मुआवजा चाहते हैं।
इस पर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीधे हस्तक्षेप संभव नहीं है, लेकिन मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के तहत जिन किसानों ने आवेदन दिए हैं, उनकी भूमियों का परीक्षण कर नियमानुसार न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल रीवा-सीधी एनएच जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को समय पर पूरा करने और किसानों के हितों में पारदर्शिता बनाए रखने की दोहरी चुनौती प्रशासन के सामने है। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
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