
नईदुनिया प्रतिनिधि,रीवा। गांधी मेमोरियल अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई महज दिखावा साबित हुई है।
मौत के बाद शासन ने जिस डॉक्टर गुंजन गोस्वामी को निलंबित किया था, उसे महज 20 दिन के भीतर ही बहाल कर दिया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियों में आ गया था। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया तो सरकार बैकफुट पर आ गई थी।
जनता के गुस्से को शांत करने के लिए शासन ने आनन-फानन में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। मेडिकल कॉलेज के डीन और अस्पताल अधीक्षक को भी हटा दिया गया था। साथ ही मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए थे। लोगों को लगा था कि इस बार दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
विभाग का असली खेल अब सामने आया है। सूत्रों के अनुसार डॉक्टर गुंजन गोस्वामी का निलंबन समाप्त कर उन्हें फिर से ड्यूटी पर बुला लिया गया है। हैरानी की बात यह है कि कल्पना मिश्रा मामले की मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट दो महीने बाद भी नहीं आई है। बिना जांच रिपोर्ट आए ही निलंबन कैसे खत्म कर दिया गया, इस पर स्वास्थ्य विभाग के पास कोई जवाब नहीं है।
एक तरफ आरोपी डॉक्टर की बहाली हो गई, दूसरी तरफ पीड़ित परिवार आज भी न्याय के लिए भटक रहा है। कल्पना के पिता 15 दिन तक आमरण अनशन पर बैठे रहे। प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। अब वे फिर से कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। परिवार का आरोप है कि स्वास्थ्य महकमा लीपापोती कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि रीवा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह जिला है। यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद सवालों के घेरे में है। इस मामले में भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा भी सरकार को कठघरे में खड़ा कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि डॉक्टर भगवान नहीं, नोट छापने की मशीन बन गए हैं।फिलहाल 20 दिन में हुई इस बहाली ने साबित कर दिया है कि कल्पना मिश्रा की मौत पर हुई कार्रवाई सिर्फ जनता को दिखाने के लिए थी।
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