• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • रीवा

7 लाख का बिल बना 40 लाख! म्यार नदी पर पुल निर्माण में बड़ा फर्जीवाड़ा, अधिकारियों-ठेकेदार पर FIR

सिंगरौली जिले में म्यार नदी पर पुल निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) रीवा ने जांच के बाद लोक निर्माण विभाग सेतु निर्माण के दो तत्कालीन अधिकारियों और रीवा के ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 07:41:48 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 08:01:05 PM (IST)
7 लाख का बिल बना 40 लाख! म्यार नदी पर पुल निर्माण में बड़ा फर्जीवाड़ा, अधिकारियों-ठेकेदार पर FIR
म्यार नदी पर पुल निर्माण में भ्रष्टाचार पर दो अधिकारियों पर एफआईआर (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. म्यार नदी पर पुल निर्माण में 33 लाख रुपये का भ्रष्टाचार
  2. दो अधिकारियों व ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज की गई है
  3. 7.37 लाख के बिल को 40.91 लाख का बनाया

नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। सिंगरौली जिले में म्यार नदी पर पुल निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) रीवा ने जांच के बाद लोक निर्माण विभाग सेतु निर्माण के दो तत्कालीन अधिकारियों और रीवा के ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

आरोप हैं कि 7.37 लाख के बिल को कूटरचित कर 40.91 लाख रुपये का बना दिया और भुगतान भी हो गया। पेनाल्टी से बचने के लिए सरकारी माप पुस्तिका ही गायब कर दी गई।

मामला चाचर से कुल्हनिया मार्ग में म्यार नदी पर पुल व पहुंच मार्ग निर्माण का

यह मामला चाचर से कुल्हनिया मार्ग में म्यार नदी पर पुल व पहुंच मार्ग निर्माण का है। इसका ठेका रीवा की फर्म मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को पांच फरवरी 2016 को दिया गया था। 574.32 लाख की लागत वाले इस काम को 18 महीने में पूरा करना था, लेकिन ठेकेदार ने लगभग चार महीने की देरी से एक अगस्त 2018 को काम पूरा किया।


तत्कालीन एसडीओ सुशील कुमार मिश्रा ने जनवरी 2019 में भुगतान के लिए सात लाख 37 हजार 861 रुपये का अंतिम देयक पेश किया।

ऑडिटर ने काम में देरी, टेस्ट रिपोर्ट न देने और अन्य कमियों पर 16 लाख 78 हजार 437 रुपये की पेनाल्टी तय की। इससे बचने के लिए एसडीओ मिश्रा ने ठेकेदार व लोक निर्माण विभाग सेतु निर्माण उप संभाग सीधी के तत्कालीन उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी के साथ मिलकर साजिश रची। जांच में सामने आया कि महत्वपूर्ण दस्तावेज माप पुस्तिका क्रमांक 605 को कार्यालय से गायब कर दिया गया, जबकि एमपी 606 और 734 में काट-छांट और ओवरराइटिंग की गई।

यह भी पढ़ें- मुरैना में जमीन सीमांकन के बदले रिश्वत लेता पटवारी गिरफ्तार, ग्वालियर लोकायुक्त टीम ने की कार्रवाई

एक नवंबर 2018 की बैकडेट में 40 लाख 91 हजार 300 रुपये का कूटरचित बिल तैयार किया। ईओडब्ल्यू का कहना है कि इसका एकमात्र उद्देश्य पेनाल्टी की राशि को शून्य करना और शासन को वित्तीय क्षति पहुंचाकर अवैध लाभ लेना था। ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।