
श्याम मिश्रा, नईदुनिया,रीवा। मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर पूरा प्रदेश अपनी गौरवशाली यात्रा का उत्सव मना रहा है। इस ऐतिहासिक सफर में रीवा की कहानी बेहद खास है।
कभी बघेल राजवंश की राजधानी रहा रीवा आजादी के बाद विंध्य प्रदेश की राजधानी बना और 1 नवंबर 1956 को विंध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश में विलय के साथ नए राज्य का हिस्सा बन गया।
रीवा का इतिहास सदियों पुराना है। बघेल राजवंश के शासनकाल में यह प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा। आजादी के बाद 1948 में कई रियासतों को मिलाकर विंध्य प्रदेश का गठन किया गया और रीवा को उसकी राजधानी बनाया गया।
26 जनवरी 1950 को विंध्य प्रदेश भाग-सी राज्य बना। इसके बाद राज्य पुनर्गठन के तहत 1 नवंबर 1956 को इसका मध्य प्रदेश में विलय हो गया। इस तरह रीवा ने अपनी राजधानी की पहचान छोड़कर मध्य प्रदेश के एक महत्वपूर्ण संभागीय मुख्यालय के रूप में नई यात्रा शुरू की।
रीवा की पहचान दुनिया भर में सफेद बाघों की धरती के रूप में है। वर्ष 1951 में तत्कालीन रीवा महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव ने गोविंदगढ़ के जंगलों में सफेद बाघ के शावक को पकड़ा था। इसका नाम मोहन रखा गया। मोहन से ही दुनिया में सफेद बाघों की वंश परंपरा आगे बढ़ी। इस ऐतिहासिक घटना ने रीवा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
पं. श्रीनिवास तिवारी: विंध्य की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में शामिल श्रीनिवास तिवारी सात बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए। वे 24 अक्टूबर 1993 से 1 फरवरी 1999 और 2 फरवरी 1999 से 12 दिसंबर 2003 तक मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। शिक्षा और सहकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को रीवा की राजनीतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव: रीवा रियासत के अंतिम शासक रहे महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव ने सफेद बाघ मोहन के संरक्षण और पहचान को दुनिया तक पहुंचाया। वे रीवा से लोकसभा सांसद भी निर्वाचित हुए।
सुंदरलाल तिवारी: पं. श्रीनिवास तिवारी के पुत्र सुंदरलाल तिवारी रीवा से लोकसभा सांसद (1999-2004) और गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। उनका राजनीतिक योगदान विंध्य की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा।
राजेंद्र शुक्ल: रीवा के विकास की वर्तमान यात्रा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की भूमिका उल्लेखनीय है। वे 2003 से लगातार पांच बार रीवा विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। उन्होंने प्रदेश सरकार में ऊर्जा, खनिज और जनसंपर्क सहित महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं।
रीवा आज ऊर्जा और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। गुढ़ स्थित 750 मेगावाट क्षमता वाला रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्रोजेक्ट प्रदेश की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। इसकी पूरी क्षमता 3 जनवरी 2020 को कमीशन हुई।
इस परियोजना से मध्य प्रदेश के साथ दिल्ली मेट्रो को भी बिजली मिलती है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, सड़क नेटवर्क, शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार और रीवा एयरपोर्ट की शुरुआत क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 20 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रीवा एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना अभी शेष है।
आज रीवा संभाग में छह जिले शामिल हैं। इनमें रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर हैं। यह संभाग शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में अपनी संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है।
मैं हूं रीवा... मेरी पहचान सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि संघर्ष, संस्कृति, शिक्षा और विकास की वह यात्रा है, जिसने मुझे विंध्य की शान बनाया। सफेद बाघ मोहन की धरती से लेकर सोलर ऊर्जा के आधुनिक केंद्र तक का सफर मेरी गौरवगाथा है।
रीवा में मुख्य रूप से बघेली बोली जाती है, जो अवधी से मिलती-जुलती मधुर बोली है। यहां की आम बोलचाल में "का हो, कहां जात हौ" जैसी अपनी मिठास है।
व्यंजन: यहाँ के प्रमुख व्यंजन में बघेली - इंदौरी, इदहर, बगजा, रिकमछ, कढ़ी, खमानी, बरा, बिरवा-भाजी, महुए के लड्डू, रसाज, चावल की रोटी और प्रसिद्ध रीवा के कबाब शामिल हैं।
संस्कार: रीवा संस्कारधानी कहलाता है। अतिथि देवो भव: यहाँ की परंपरा है। बघेली लोकगीत, करमा, शैला नृत्य और दिवारी उत्सव में विंध्य की संस्कृति झलकती है।
विशेष शिल्प - सुपाड़ी के खिलौने: रीवा की पहचान सुपाड़ी से बने खिलौने भी हैं। गुढ़ क्षेत्र के कारीगर सुपाड़ी की लकड़ी से हाथी, घोड़ा, हिरण और देवी-देवताओं के सुंदर खिलौने बनाते हैं, जो जीआई टैग की कतार में हैं और विदेशों तक जाते हैं।
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