
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में पुलिस की फर्जी गवाही दिलाने के बाद अब मऊगंज जिले में भी इसी तरह का मामला आया है। यहां अलग-अलग पदस्थापना के दौरान थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर पर फर्जी गवाही दिलाने के आरोप लगे हैं। उन्होंने 145 मामलों में चुनिंदा आठ लोगों को गवाह बनाया है। जांच के बाद छह मामलों में फर्जी गवाह तैयार करने के आरोप की पुष्टि के बाद उन्हें निलंबित किया जा चुका है।
मऊगंज के एसपी दिलीप सोनी ने बताया कि उप निरीक्षक जगदीश सिंह ठाकुर ने शाहपुर, देवतालाब व नईगढ़ी में आबकारी एक्ट व एनडीपीएस एक्ट के मामलों में आठ चुनिंदा लोगों को ही गवाह बनाया। इनमें उनका चालक, रसोइया, थाने के सफाई कर्मी सहित अन्य लोग शामिल हैं। जगदीश ठाकुर के विरुद्ध जांच प्रस्तावित की गई है।
इस मामले की शिकायत समाजसेवी कुंज बिहारी तिवारी ने रीवा आईजी से की थी। उनका कहना है कि जगदीश सिंह ठाकुर लगातार अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कुछ चुनिंदा लोगों को ही एफआईआर में गवाह बना रहे हैं। उन्होंने एसपी को 145 अपराध संख्या के साथ सूची भी दी है। करीब 90 प्रतिशत मामले आबकारी एक्ट से संबंधित हैं।
सेवानिवृत्त डीएसपी डीपी सिंह ने बताया कि इस तरह के मामले केवल आबकारी एक्ट में देखने को मिलते हैं। इसके पीछे कारण यह है कि जब किसी गांव में अवैध शराब बिक्री पकड़ी जाती है तो ग्रामीण गवाही देने से इन्कार कर देते हैं। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी समस्या गवाह तलाशने की होती है। लिहाजा पुलिस अपने से जुड़े लोगों का नाम गवाही में दे देती है।
अनूपपुर जिले में 23 सितंबर 2023 को रामनगर थाना में शिकायत हुई थी कि जिनेंद्र गुप्ता और रवि साहू ने 80 मामलों में गवाही दी थी। ये दोनों ग्राम रक्षा समिति के सदस्य भी थे। हैरत की बात यह है कि रवि और जिनेंद्र एक ही समय में आठ किलोमीटर दूर दो अपराध स्थलों पर एक साथ गवाह बने थे।