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मुफ्त मजदूरी अब नहीं, रीवा कलेक्ट्रेट पहुंचे पैरामेडिकल छात्र; स्टाइपेंड और स्कॉलरशिप के लिए उग्र आंदोलन की चेतावनी

छात्रों ने पूर्व में सौंपे गए ज्ञापन पर अब तक हुई कार्रवाई और मिले आश्वासन की प्रगति रिपोर्ट मांगी है, इसके साथ ही छात्रों ने प्रशासन के सामने मध्य प्...और पढ़ें

By Shyam MishraEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 09:29:19 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 09:29:19 PM (IST)
मुफ्त मजदूरी अब नहीं, रीवा कलेक्ट्रेट पहुंचे पैरामेडिकल छात्र; स्टाइपेंड और स्कॉलरशिप के लिए उग्र आंदोलन की चेतावनी
अपनी आवाज सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास करते पैरामेडिकल छात्र। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रूप से तीन-चार बड़े मुद्दे उठाए
  2. बोले-आश्वासनों के सहारे नहीं, भविष्य अधर में लटका हुआ
  3. पोर्टल को तुरंत खोलकर सभी को स्कॉलरशिप दी जाए

नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध संजय गांधी अस्पताल के पैरामेडिकल छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे।

अब तक हुई कार्रवाई और आश्वासन की प्रगति रिपोर्ट मांगी

लगातार अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे इन छात्रों का कहना है कि वे केवल आश्वासनों के सहारे नहीं बैठ सकते, क्योंकि उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रूप से तीन-चार बड़े मुद्दे उठाए हैं।

पोर्टल नहीं खोला गया, छात्र फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं

छात्रों का आरोप है कि सत्र 2023-24 के पात्र छात्रों को अभी तक स्कॉलरशिप का लाभ नहीं मिल सका है, एडमिशन प्रक्रिया में देरी के कारण आज तक पोर्टल नहीं खोला गया है, जिससे छात्र फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं. उन्होंने मांग की है कि पोर्टल को तुरंत खोलकर सभी को स्कॉलरशिप दी जाए।


अस्पताल में 8 से 10 घंटे की कड़ी ड्यूटी करते हैं

छात्रों ने कहा कि वे अस्पताल में 8 से 10 घंटे की कड़ी ड्यूटी करते हैं। इस दौरान होने वाले दैनिक खर्चों का निर्वहन करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है, आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन छात्रों ने अनिवार्य रूप से स्टाइपेंड दिए जाने की मांग की है।

डिप्लोमा धारकों को पहली प्राथमिकता दी जाए

छात्रों ने कहा कि डिप्लोमा और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भी छात्रों को रोजगार के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। मांग है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा निकाली जाने वाली आगामी सरकारी वैकेंसियों में रीवा के इन स्थानीय प्रशिक्षित डिप्लोमा धारकों को पहली प्राथमिकता दी जाए।

सबसे बड़े अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होंगी

छात्रों ने बताया कि वे लगातार शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापनों के माध्यम से अपनी आवाज सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यदि उनकी वाजिब मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे अपने भविष्य को बचाने के लिए कार्य बहिष्कार और अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे उग्र कदम उठाने पर मजबूर होंगे. इससे आने वाले दिनों में विंध्य क्षेत्र के इस सबसे बड़े अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

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