
नईदुनिया प्रतिनिधि, सीधी। ग्रामीणों ने पंचायत पर एक ही निर्माण कार्य को 9 अलग-अलग नामों से दिखाकर 20 लाख से अधिक की राशि निकालने का गंभीर आरोप लगाया है। इस पूरे खेल में निर्माण एजेंसी के साथ तकनीकी अमले की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
ग्रामीणों के मुताबिक जी रामजी योजना के तहत मेढ़ बंधान, डक पोंड और खेत तालाब के नाम पर राशि निकाली गई है।
कृष्ण कुमार के खेत में मेढ़ बंधान, अशोक के घर के पास, अनुसुइया के घर के पास, फुलवहा बांध के पास, बैरिहाई बांध के पास डक पोंड निर्माण, राजेंद्र मिश्रा, अनुसूया प्रसाद और रोहणी मिश्रा के खेत में खेत तालाब निर्माण कागजों में दिखाए गए हैं।
मौके पर सिर्फ एक आयताकार बावली बनी है। शेष कार्य धरातल पर हुए ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, भूमिहीन हितग्राहियों के नाम पर भी निर्माण दिखा दिया गया। प्रभा पति सच्चिदानंद मिश्रा के नाम पर कपिलधारा कूप और बालेंद्र पिता सच्चिदानंद के नाम पर मेढ़ बंधान स्वीकृत दिखाकर राशि आहरण कर ली गई, जबकि दोनों के पास खुद की जमीन ही नहीं है।
पांचवें राज्य वित्त आयोग मद से सुरेश ट्रेडर्स गिजवार के नाम पर लाखों का बिल भुगतान किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस नाम की कोई दुकान गिजवार में संचालित ही नहीं है। सचिव श्यामलाल केवट ने अपने सगे-संबंधी को वेंडर बनाकर फर्जी भुगतान किया है।
ई-भुगतान क्रमांक 3951227 दिनांक 19 जुलाई 2026 को 22 बिलों के एवज में 2,38,266 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है, जबकि 22 बिलों का जोड़ 1,69,686 रुपये ही होता है। 68,580 रुपये का कोई हिसाब नहीं है।
आरटीआई मांगी तो गलत जानकारी दी गई। पूरे मामले में फर्जीवाड़ा कर राशि निकाली गई है, जांच होनी चाहिए।
राजेश पांडेय, शिकायतकर्ता
ग्रामीणों ने बताया कि निजी पट्टे की जमीन पर तीन पीसीसी सड़कों का निर्माण करा दिया गया है, जिसमें मेन मस्जिद से कब्रिस्तान तक, वार्ड 10 राममिलन यादव के घर से शिवरतन पनिका के घर तक और तेजभान सिंह के घर से कमलेश चतुर्वेदी के घर तक सड़क बनाई गई है।
यदि फर्जीवाड़ा हुआ है तो जांच टीम गठित कर मैं स्वयं स्थल निरीक्षण करूंगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई और वसूली की जाएगी।
सुरभि श्रीवास्तव, सीईओ, जनपद पंचायत मझौली
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