
नईदुनिया न्यूज, मऊगंज। जिले में खुद को पटवारी बताकर लोगों को झांसे में लेने और फिर लूट की वारदात को अंजाम देने वाले बुलेट सवार संदिग्ध को लेकर लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।
ताजा मामला मऊगंज के वार्ड क्रमांक 8 से सामने आया है, जहां एक शिक्षक को कथित तौर पर पटवारी बनकर रोकने के बाद उसके पास रखे 9500 रुपये छीन लिए गए। घटना 10 सितंबर की दोपहर करीब 3:30 बजे की बताई जा रही है।
देवेंद्र मणि द्विवेदी निवासी पिपरा, थाना लौर, मऊगंज स्थित मां गायत्री पब्लिक स्कूल में शिक्षक हैं। स्कूल से छुट्टी के बाद वह अपने घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान वार्ड क्रमांक 8 में राजभान कुशवाहा की दुकान के पास एक व्यक्ति बुलेट से पहुंचा और शिक्षक को रोक लिया।
बताया जा रहा है कि संदिग्ध ने पहले शिक्षक को प्रणाम किया और बातचीत करते हुए स्वयं को पटवारी बताया। इसके बाद कथित तौर पर बातचीत के दौरान उसने शिक्षक के पास रखे 9500 रुपये छीन लिए और बुलेट से मौके से फरार हो गया। पीड़ित के मुताबिक आरोपी ने काले रंग के कपड़े और हेलमेट पहन रखा था।
इस घटना ने इसलिए भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि क्षेत्र में पहले भी खुद को पटवारी बताकर लोगों से संपर्क करने और लूट करने की कथित घटनाओं की चर्चा सामने आती रही है। स्थानीय लोगों द्वारा पूर्व की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि रघुराजगढ़ क्षेत्र में साहू परिवार के यहां भी बुलेट सवार द्वारा पटवारी बताकर गहने लूटने की वारदात सामने आई थी।
मऊगंज के फूलगांव में डिगन गुप्ता की लड़की के गहने कथित रूप से इसी तरीके से लूटे जाने की बात भी सामने आई है। वहीं नईगढ़ी थाना क्षेत्र में भी पटवारी बनकर सर्वे के नाम पर लोगों को रोकने और कथित तौर पर लूट करने जैसी घटना की चर्चा है।
इन सभी पुराने मामलों की परिस्थितियां और उनमें शामिल व्यक्ति एक ही हैं या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिर भी घटनाओं में बताए जा रहे समान तरीके—बुलेट सवार होना, खुद को पटवारी बताना और सर्वे अथवा सरकारी काम का हवाला देकर विश्वास हासिल करना ने पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण जांच बिंदु खड़ा कर दिया है।
ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में पटवारी सहित राजस्व विभाग के कर्मचारियों का लोगों से जमीन, सीमांकन, नामांतरण, सर्वे और अन्य राजस्व कार्यों के सिलसिले में संपर्क होता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर लोगों को रोकता है तो आम नागरिक उसके परिचय पर तत्काल संदेह नहीं करता।
भरोसे का फायदा उठाकर यदि कोई व्यक्ति अपराध कर रहा है तो मामला और गंभीर हो जाता है। पुलिस के लिए अब यह पता लगाना अहम होगा कि वारदात में इस्तेमाल की गई बुलेट कहां से आई, आरोपी किन रास्तों से आया और घटना के बाद किस दिशा में गया।
घटना स्थल और आसपास मौजूद दुकानों या प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरे पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हो सकते हैं। यदि आरोपी घटना से पहले या बाद में किसी कैमरे में कैद हुआ है तो उसके वाहन, कपड़ों, हेलमेट और आने-जाने के मार्ग के आधार पर उसकी पहचान तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
पुलिस द्वारा यदि आसपास के सीसीटीवी के साथ-साथ पूर्व में सामने आई समान घटनाओं के रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है, तो यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्या इन घटनाओं में किसी एक ही व्यक्ति या गिरोह की भूमिका है।
इस तरह की घटना के बाद आम लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। कोई व्यक्ति यदि स्वयं को पटवारी, राजस्व कर्मचारी या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर रास्ते में रोकता है और दस्तावेज, सर्वे या किसी सरकारी कार्रवाई के नाम पर निजी तौर पर पैसे या सामान मांगता है तो बिना सत्यापन उसके दावे पर भरोसा न करें।
किसी संदिग्ध व्यक्ति से सामना होने पर उससे बहस या खुद पकड़ने का प्रयास करने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना देना सुरक्षित रहेगा। संदिग्ध वाहन का नंबर, रंग, मॉडल, कपड़े, हेलमेट और भागने की दिशा जैसी जानकारी पुलिस को दी जाए तो जांच में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
फिलहाल मऊगंज की इस घटना में आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी का इंतजार है। यदि जांच में पूर्व की घटनाओं से कोई कनेक्शन सामने आता है तो क्षेत्र में सक्रिय किसी संगठित गिरोह की तस्वीर भी साफ हो सकती है।
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